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धमाकों से दूर रखें बच्‍चों को
- डॉ. विशाल रतन मुंजा

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पटाखों का उत्साह बच्चों के होश उड़ा देता है, लेकिन पालकों को उनकी खुशियाँ मनाने के साथ-साथ सावधान रहने का सबक भी देना चाहिए। अधिक नजदीक से फोड़े जाने वाले पटाखे कान का परदा भी उड़ा सकते हैं। यह बात बच्चे के साथ पालक को भी पता होना चाहिए। यह सच है कि देश में उत्पादित पटाखों पर रखी जाने वाली सावधानियों की सूची प्रिंट नहीं की जाती, लेकिन लापरवाही से इस्तेमाल करने की सजा भी तो बच्चों को ही भुगतना पड़ता है। त्यौहारों पर आप बच्चों के साथ अपना भी मजा खराब नहीं करना चाहेंगे। इसलिए सावधानी का पाठ पालकों और बच्चों को समान रूप से सीखना चाहिए। याद रखें कान के परदे की क्षति स्थायी होती है। यह ठीक है कि सर्जरी से कुछ मामलों में परदे फिर से सिए जा सकते हैं, लेकिन यह नौबत ही न आए यह ज्यादा जरूरी है।

दीपावली दीपों का त्योहार है। इसमें अंधकार (बुराई) पर उजाले (अच्छाई) की विजय को पर्व के रूप में मनाया जाता है। पुराण में अग्नि को उजाले का स्वरूप बताया गया है, और किसी कारण यदि उजाले का अभाव हो तो आवाज को खुशियाँ मनाने का तरीका माना गया है। दीपक और पटाखे जीवन में उसी रोशनी और आवाज को दर्शाते हैं और खुशी मनाने के स्वरूप में स्वीकार किए गए हैं। यही मान्यता कभी-कभी अभिशाप के रूप में सामने आती है।

पटाखों से उत्पन्न तेज शोर कान के लिए घातक है और कई बार कान के परदे में छेद कर देता है या बहरापन ला देता है। 80 डीबी से ऊपर का लगातार शोर बहरेपन का कारण बन सकता है। इससे सिरदर्द, चिड़चिड़ापन व अनिद्रा की शिकायत हो सकती है। एकाएक 120 डीबी की आवाज से, कान का सुन्न होना, सुनाई न देना, कान में सनसनाहट व घंटी-सा बजना आम शिकायत होती है। लगातार एक के बाद एक जोरदार धमाके कान का परदा फटने व बहरापन के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। बच्चों में अधिकतर पटाखों की वजह से बहरापन पाया जाता है। ये बच्चे 4 किलोहर्ट्ज और 3 किलोहर्ट्ज तीव्रता की ध्वनियाँ सुनने में अक्षम पाए जाते हैं। प्रारंभ में मरीज कानों में भारीपन या सुन्न होने की शिकायत लेकर आते हैं, बाद में उनके परदे में छेद या मवाद की शिकायत पाई जाती है। इन सब समस्याओं को कुछ सावधानियाँ बरतने से टाला जा सकता है। पटाखों से तीव्र गति की तरंगें जो 100 डीबी से ऊपर की होती हैं।

उन तरंगों के दबाव से कान का परदा फट जाता है और सुनने की नस को भारी क्षति पहुँचती है। अगर इस प्रकार का शोर लगातार या बार-बार होता है तो स्थायी रूप से बहरापन हो सकता है। इनके लिए शीघ्र अतिशीघ्र विशेषज्ञ से इलाज करवाना चाहिए। जनसाधारण इन प्रभावों से अनभिज्ञ हैं। पटाखों के पैकेट्स पर भी इनकी जानकारी नहीं होती, यह कानूनी तौर पर आवश्यक है कि इनसे होने वाले हादसों से अवगत कराया जाए। थोड़े समय की खुशी, हमेशा की परेशानी का सबब बन सकती है।
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