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जब बढ़े उम्र तो क्‍या खाएँ...
-डॉ. वंदना बागड़िया

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पैंतीस की उम्र के बाद अक्सर यह देखा गया है कि शरीर की मांसपेशियाँ घटने लगती हैं और चर्बी चढ़ना शुरू हो जाती है। साथ ही प्रोटीन भी किशोरावस्था की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत कम हो जाता है। वृद्ध व्यक्ति प्रोटीन-युक्त खाद्य पदार्थों का पर्याप्त मात्रा में सेवन करे ताकि हड्डियों व मांसपेशियों की ताकत बनी रहे।

कहते हैं- 'जिंदगी लंबी नहीं, बड़ी होनी चाहिए।' परंतु लंबी जिंदगी की कामयाबी शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक सेहत पर निर्भर होती है। सफल एवं स्वस्थ वृद्धावस्था के तीन मुख्य उपाय हैं- बीमारियों से बचाव, जिंदगी से लगाव एवं शारीरिक कार्यप्रणाली का सुचारु संचालन।उम्र बढ़ना एक सामान्य व प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो जन्म लेते ही शुरू हो जाती है और मृत्यु पर खत्म होती है, परंतु संतुलित व पोषक आहार से इस क्रिया को धीमा जरूर किया जा सकता है ताकि इंसान वृद्धावस्था में भी शारीरिक एवं मानसिक रूप से चुस्त-दुरुस्त रहे।

पैंतीस की उम्र के बाद अक्सर यह देखा गया है कि शरीर की मांसपेशियाँ घटने लगती हैं और चर्बी चढ़ना शुरू हो जाती है। साथ ही प्रोटीन भी किशोरावस्था की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत कम हो जाते हैं। वृद्ध व्यक्ति प्रोटीन-युक्त खाद्य पदार्थों का पर्याप्त मात्रा में सेवन करे ताकि हड्डियों व मांसपेशियों की ताकत बनी रहे। ऊर्जा देने वाले खाद्य पदार्थ भी जरूरी हैं, परंतु शकर (मीठा) एवं तले हुए पदार्थों के अधिक सेवन से बदहजमी, मधुमेह या हृदय रोग होने की आशंकाएँ बढ़ जाती हैं। कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने वाले पदार्थ (जैसे कि समोसे, कचोरी,अंडे का पीला भाग अथवा मलाई-युक्त दूध) का सेवन नहीं करना चाहिए। आहार में रेशे वाले खाद्य पदार्थ जरूर शामिल हों। इससे हाजमा सुधारता है एवं खून में कोलेस्ट्रॉल और शक्‍कर की मात्रा को संतुलित करते हैं। परंतु ध्यान रहे कि रेशेयुक्त पदार्थों की अति इस उम्र में पेटकी बीमारियों एवं गैस की परेशानी उत्पन्न कर सकते हैं।

वृद्धावस्था में एक पदार्थ जिसकी शायद सबसे अधिक आवश्यकता होती है, वह है कैल्शियम। पचास से अधिक उम्र की औरतों में खासतौर पर इसकी आवश्यकता बढ़ जाती है और अगर इसकी पूर्ति न की जाए तो उनमें अस्थि रोग, ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों की कमजोरी) व दाँतोंके रोग होने की आशंकाएँ बढ़ जाती हैं। कैल्शियम का सबसे बड़ा स्रोत है दूध जिसमें प्रोटीन की मात्रा भी भरपूर होती है। हरे पत्ते वाली सब्जियों में एवं सोयाबीन, रागी और मछली में भी कैल्शियम पाया जाता है। वृद्धावस्था में होने वाली खून व लौह तत्व की कमी (एनीमिया) को दूर करने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियाँ, खजूर, गुड़, मूँगफली, प्रोटीन-युक्त खाद्य पदार्थ एवं विटामिन 'सी'युक्त खाद्य पदार्थ (जैसे टमाटर, नीबू-पानी, अंकुरित ऊसल) का संतुलित सेवन जरूरी है। हड्डियों एवं जोड़ों को मजबूत बनाने के लिए नियमित रूप से मालिश, सूर्य की रोशनी एवं कैल्शियम विटामिन 'डी' युक्त आहार आवश्यक है।
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