क्या है एड्स की दवा
किसी भी लंबे समय तक चलने वाले संक्रमण की तरह ही एड्स का इलाज भी बेहद सक्षम तरीके से संभव हो रहा है। तीस से ज्यादा प्रकार की दवाइयाँ इसमें इस्तेमाल होती हैं एवं ये दवाएँ डायबिटीज एवं ब्लड प्रेशर की तरह ही हमेशा लेनी पड़ती हैं। इससे एचआईवी वायरस पूरी तरह सेनियंत्रण में रहता है।
एआरटी क्या है?
एआरटी (एंटी रिट्रोवायरल थेरेपी) अर्थात वायरस को नष्ट करने वाली दवाएँ। ये दवाएँ मरीजों के लिए पूर्णतः निःशुल्क हैं एवं सभी मरीजों की शासन द्वारा स्थापित एआरटी केंद्रों पर प्राप्त होती हैं। ये सभी दवाएँ प्राथमिक स्तर पर मरीजों का इलाज करती हैं एवं बीमारी को बढ़ने से रोकती हैं। इसीलिए इनका प्रयोग आजीवन करना जरूरी है। यदि ये दवाएँ असर न करें तभी दूसरी दवाओं का सहारा लेना पड़ता है।
क्या जाँच बहुत महँगी है?
बिलकुल नहीं। अब तो यह जाँच पूर्णतः निःशुल्क हो रही है, मरीज को बस सरकारी अस्पतालों के निर्धारित केंद्र पर जाना जरूरी है। पहले जब तक एड्स की जाँच शासन द्वारा नहीं की जाती थी तब तक इसका खर्च भी काफी था।
एआरटी के प्रभाव एवं दुष्परिणाम
दरअसल इन दवाओं का प्रभाव लगभग आठ हफ्तों में आता है इसीलिए प्राथमिक रूप से आने पर मरीजों की लीवर, किड़नी, हीमोग्लोबिन की पूर्ण जाँच करके ही इसे शुरू करते हैं। ये दवाएँ सभी मरीजों को देकर उनकी निरंतर जाँच की जाती है। एनिमिया, पीलिया, सिरदर्द, उल्टी, सामान्य रूप से होते हैं एवं हम उनकी समुचित चिकित्सा कर सकते हैं। एड्स संक्रमित बच्चों को भी इसी तरह से दवा दी जाती है, उनके लिए पीने योग्य अथवा पानी में घुलने वाली दवाएँ उपलब्ध हैं।
कोई खतरा नहीं है साथ में रहने से
एचआईवी- एड्स के मरीज के साथ रहने में किसी भी प्रकार का संक्रमण का खतरा नहीं है। बल्कि सही मानसिक एवं सामाजिक संबल से मरीज का स्वास्थ्य सुधरता है। उन्हें डर एवं अवसाद में बचाना ही हम सबका दायित्व है। यदि यह हम कुछ वर्ष कर सके तो यह संक्रमण सामान्य टीबीके कीटाणु की तरह सामान्य हो जाएगा। अपने आप प्रवेश न कर पाने के कारण यह वायरस तेजी से कम ही होगा। दवाएँ मरीजों की अकाल मृत्यु में जाने से रोक रही हैं।
याद रखें
दवा की उपलब्धता के कारण किसी भी प्रकार से इसके बचाव के तरीकों के प्रति लापरवाही नहीं होनी चाहिए। दरअसल एचआईवी वायरस से बचने का एकमात्र उपाय है इससे बचाव।
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