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घर भी हो सकता है बीमारी का कारण...
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घरेलू कीटों से होने वाले कई पेट रोगों के लिए मक्खी जिम्मेदार है। मक्खी जितनी बार जहाँ-जहाँ बैठती वहीं विष्टा करती है। अगर घर की रसोई में रखे किसी खाद्य पदार्थ पर यदि वह कई बार बैठती और उड़ती है तो वह उतनी ही बार अपना मल छोड़ जाती है। दुनिया केकिसी भी समाज में यहाँ तक कि विकसित समाज में भी मक्खी का मल भोजन के साथ पेट में जाने से रोकना असंभव है। औसतन एक इंसान अपने जीवनकाल में न चाहते हुए भी साढ़े चार किलो वजन के बराबर मक्खी का मल उदरस्थ कर जाता है। गंदगी पर बैठकर अपने साथ रोगाणु लेकर आने वाली मक्खी बिना किसी भेदभाव के खाद्य पदार्थों को भी दूषित करती है।

घरेलू मक्खी को गंदगी में पलने वाली मक्खी भी कहा जाता है। इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि घरेलू मक्खी केवल घर के खाद्य पदार्थों पर जिंदा रहती है। यह कीट गंदगी में ही पैदा होता है और इसी पर पलता है। यह भी एक भ्रम है कि जिस घर में गंदगी नहीं रहती वहाँ मक्खियाँ नहीं होती। दरअसल मक्खियाँ साफ घरों में भी दौरा करती हैं और खुले भोजन या जूठन से अपना आहार ग्रहण कर लेती हैं। घर में इसकी उपस्थिति से आप इतने आदी हो जाते हैं कि इससे होने वाले रोगों के खतरे भी बिसरा देते हैं।

क्या आपको पता है कि मक्खी से कंजक्टिवाइटिस, पोलियोमायलेटिस, टायफॉयड फीवर, टीबी, एंथ्रेक्स, लैप्रोसी, कोढ़, कॉलरा, डायरिया और डीसेंट्री जैसी बीमारियाँ हो सकती हैं? मक्खियों का जोखिम केवल यहीं तक नहीं है। वे मुर्गियों पर पराजीवी टेपवर्म छोड़ सकती हैं तथा घोड़ों पर पराजीवी राउंडवर्म को बैठा सकती हैं। ब्लो फ्लाई, बॉटल फ्लाई, स्क्रू वर्म फ्लाईस और फ्लेश फ्लाईस का लार्वा स्तनपायी जानवरों के मृत अथवा जीवित शरीर पर जिंदा रह सकता है। इससे भेड़ों के खून में जहर फैल सकता है तथा वे मर भी सकती हैं।

बाटल फ्लाई और ब्लो फ्ला

दोनों तरह की मक्खियाँ घरेलू मक्खियों से आकार में बड़ी होती हैं। ये आमतौर पर मृत पशुओं या पशुओं के जख्मों पर पलती हैं। यह न भूलें कि गर्मियों के मौसम में ये घरों में भी पनाह ढूँढती हैं। इसका लार्वा घरेलू पशुओं की विष्टा पर जीवन शुरू करता है। अक्सर इसे घरेलू कुत्तों के चेहर पर मंडराते हुए देखा जा सकता है।
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