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जैव विष से दर्द से छुटकारा!
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औद्योगिक विष विज्ञान अनुसंधान केंद्र ने बताया है कि घोंघे जैसे समुद्री जीव में पाए जाने वाले जैव विष (बायोटॉक्सिन) से भी दर्द निवारक दवा बनाई जा सकती है।

'फोनोटॉक्सिन' नामक इस जैव विष में मॉरफीन से हजार गुना ज्यादा दर्द निवारक क्षमता है। इस दवा की बहुत कम मात्रा से ही कैंसर व एड्स आदि के मरीजों को असहनीय पीड़ा से राहत मिल सकेगी। भारत में 'कोनस' घोंघे की 72 प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इस दिशा में अभी भारत में क्लीनिकल परीक्षण होना बाकी है। फोनोटॉक्सिन से दवा बनाने को तत्पर विदेशी वैज्ञानिक भी इस कार्य में तत्परता से लगे हैं। दूसरी तरफ सिर्फ घोंघे से ही नहीं, जेली फिश, कैट फिश में पाए जाने वाले जैव विष से भी अब दवा बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

इन मछलियों में पाए जाने वाले जैव विष प्रोटीन आधारित हैं, जिनमें कैंसर प्रतिरोधक क्षमता है। इस दिशा में अनेक शोध कार्य हो रहे हैं। कैट फिश की विष ग्रंथियों में कार्डियोटॉनिक गुण पाए गए हैं। इससे हृदय को स्वस्थ रखा जा सकता है। इन्हीं विष ग्रंथियों से कार्डियोटॉनिक दवा विकसित करने का कार्य तत्परता से चल रहा है।

भारत में जेली फिश की 68 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें अलग-अलग तरह के प्रोटीन विद्यमान हैं। इन प्रजातियों के जैव विष से दवाई बनाने का औद्योगिक अनुसंधान चल रहा है।

बायोटॉक्सिन से दवा बनाने के कार्य भारतीय जीव वैज्ञानिक अब तत्परता से विदेशी वैज्ञानिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कर रहे हैं, ताकि भारत में कैंसर जैसे भयानक रोग को समुद्री जीवों और वनस्पतियों के जैव विष से समाप्त किया जा सके।
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