मुख्य पृष्ठ > विविध > सेहत > यूँ रहें स्वस्थ
सुझाव/प्रतिक्रिया मित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
जरूरी है विटामिन 'सी'
WDWD
-शहनाज सुल्तान अहम

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन 'सी' बहुत आवश्यक है। विटामिन 'सी' को वैज्ञानिक भाषा में एस्कर्बिक एसिड कहते हैं। विटामिन 'सी' शरीर से हड्डियों को जोड़ने वाले तंतुओं को थामे रखता है। इसकी कमी से हड्डियाँ कमजोर होने लगती हैं। मसूड़ों से खून आने लगता है। दाँत गिरने लगते हैं और मांसपेशियाँ कमजोर हो जाती हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो इसकी कमी से स्कर्वी रोग हो जाता है। विटामिन 'सी' की कमी होने पर शरीर में यदि कोई घाव हो जाए तो उसे भरने में काफी समय लगता है। इसके साथ किसी भी प्रकार का संक्रामक रोग होने का खतरा भी रहता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार एक मनुष्य को एक दिन में 30 मिलीग्राम विटामिन 'सी' लेना चाहिए। गर्भवती तथा बच्चों को दूध पिलाने वाली स्त्रियों को प्रतिदिन 60 मिलीग्राम विटामिन 'सी' की जरूरत होती हैं। शाकाहारी भोजन (फलों व सब्जियों) में विटामिन 'सी' भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके विपरीत मांसाहारी भोजन में इसकी मात्रा काफी कम होती है। सबसे अधिक विटामिन 'सी' की मात्रा नीबू, संतरा, आँवला, अन्नानस, बंद गोभी, फूल गोभी, सोया में पाई जाती है।

एक आँवले में चार संतरों के बराबर विटामिन 'सी' की मात्रा होती है। विटामिन 'सी' ही एक ऐसा विटामिन है जिसके लिए फलों और सब्जियों को पकाते, धोते और काटते समय सावधानी रखनी चाहिए, क्योंकि पकाते वक्त यह शीघ्रता से नष्ट हो जाता है। यहाँ तक कि सब्जी काटते समय हवा लगने पर भी सब्जी में मौजूद विटामिन 'सी' नष्ट होने लगता है। यदि सब्जी एल्युमीनियम के बर्तन में पकाई जाए, तब भी यह विटामिन नष्ट हो जाता है। धोते समय भी इसकी कुछ मात्रा पानी से नष्ट हो जाती है। सब्जी दुबारा गरम करने पर भी विटामिन 'सी' नष्ट हो जाता है। इसलिए भोजन बनाते समय विटामिन 'सी' नष्ट न होने पाए, इसके लिए जरूरी है कि सब्जी काटकर खुली न छोड़ें। छोटे-छोटे टुकड़ों में न काटें। थोड़े से पानी में पकाएँ। कुकर का इस्तेमाल बेहतर होगा। इस बात का ध्यान रखना होगा कि सब्जी बहुत देर तक न पकाएँ। यदि इसका प्रयोग सलाद के रूप में करें तो विटामिन 'सी' की मात्रा प्रचुरता से शरीर को मिलती है।

डिब्बों में बंद और सूखे फल-सब्जियों के बदले ताजे और फ्रीज किए फल सब्जियों में विटामिन 'सी' अच्छी मात्रा में होता है। ताजे मटर में विटामिन 'सी' 10 मिलीग्राम होता है जबकि फ्रीज किए मटर में 7 मिलीग्राम और डिब्बाबंद मटर में 4 मिलीग्राम की मात्रा होती है। धूप में सुखाए मटर में विटामिन 'सी' नष्ट हो जाता है। कहते हैं 'अति सर्वत्र वर्जयते' अति हर चीज की बुरी होती है। यही बात विटामिन 'सी' के साथ लागू होती है। विटामिन 'सी' उचित मात्रा में जहाँ स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, वहीं इसका अधिक प्रयोग शरीर में हानि पहुँचा सकता है। अधिक मात्रा में इसे लेने से पथरी हो जाती है। साथ ही यह विटामिन 'बी-12' को भी नष्ट कर देता है। यदि किसी व्यक्ति को नियमित रूप से विटामिन 'सी' लेने की आदत पड़ जाती है तो उसे एकदम छोड़ देने से त्वचा पर लाल-लाल दाने पड़ जाते हैं व खुजली होने लगती है। शरीर को बल देने वाले तत्वों की कमी होने लगती है। इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि विटामिन 'सी' हमेशा उचित मात्रा में ही लेना चाहिए।
और भी
स्‍वस्‍थ बनाए संतुलित भोजन
कैसे बचें तनाव से?
स्वास्थ्य के लिए जहर है फास्ट फूड
अपने दिल की बात सुनें
अल्जाइमर से मुक्ति है संभव?
जब बढ़ने लगे खून का दवाब