-सूर्यभानसिंह 'सूर्य'
कैंसर रोगियों के व्यापक अध्ययन के पश्चात यह तथ्य उजागर हो चुका है कि लगभग 30 से 40 लाख कैंसर रोगियों की जान बच जाती यदि वे युवावस्था में ही समुचित और संतुलित भोजन का प्रयोग कर रहे होते।
हमारे नियमित भोजन का हमारे स्वास्थ्य से गहरा संबंध है। अब तक हुए तमाम वैज्ञानिक अनुसंधानों और पोषण सर्वेक्षणों से यह जाहिर हो | स्वास्थ्य एवं पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि रेशेदार खाद्य पदार्थ हमारी सेहत के लिए वरदान साबित होते हैं। रेशेदार खाद्य पदार्थों में वनस्पतियों के वे अंश भी शामिल हैं |
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चुका है कि यदि खान-पान में सावधानी बरतें तो अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है। इसके विपरीत आहार-विहार में जरा-सी लापरवाही कई बीमारियों को निमंत्रण दे सकती है। ऐसे कई खाद्य पदार्थ हैं, जिनसे हमारा पारंपरिक परिचय है और जिनकी पोषण क्षमता के विषय में भी हम जानते हैं। इनका प्रयोग भी हम सदियों से करते आ रहे हैं, परंतु कुछ हालिया वैज्ञानिक अनुसंधानों से पता चलता है कि इन खाद्य पदार्थों में ऐसे कुछ विशेष गुण और तत्व छिपे हैं जो कई बीमारियों को छू-मंतर कर सकते हैं। यही वजह है कि अनेक बीमारियों को मात देने और इनसे बचने के लिए अब सहज-सुलभ खाद्य पदार्थों को कारगर हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
स्वास्थ्य एवं पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि रेशेदार खाद्य पदार्थ हमारी सेहत के लिए वरदान साबित होते हैं। रेशेदार खाद्य पदार्थों में वनस्पतियों के वे अंश भी शामिल हैं, जो मनुष्य के उदर और छोटी आँत से बिना पचे ही निकल जाते हैं। जो लोग पर्याप्त मात्रा में इनका इस्तेमाल करते हैं, उन्हें आँत व हृदय रोग संबंधी अनेक प्रकार की दिक्कतों से छुटकारा मिल जाता है। रेशेदार खाद्य पदार्थों का संतुलित मात्रा में इस्तेमाल करने वाले कब्ज, अतिसार और दस्त की तकलीफों से कोसों दूर रहते हैं। नींबू प्रजाति के फल और रस, मटर, फूल गोभी, टमाटर, करमकल्ला, लाल व हरी मिर्च, तरबूज और खरबूजे में विटामिन 'सी' प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। त्वचा को खून की आपूर्ति करने तथा त्वचा की सतह में मौजूद रेशेदार प्रोटीन को पचाने की क्षमता प्रदान करने में विटामिन 'सी' का महत्वपूर्ण योगदान है। इसके अलावा इन फलों व सब्जियों से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। इनका मुख्य असर त्वचा पर देखने को मिलता है।
त्वचा पर कांति और स्वास्थ्य की चमक हो तो खूबसूरती का असर दोगुना रंग जमाता है। उम्र का असर भी त्वचा से अधिक कहीं दिखाई नहीं देता। गलत और असंतुलित खान-पान से त्वचा संबंधी विकारों का खतरा बढ़ जाता है। वजन और पोषण बढ़ने के कारण त्वचा फैल जाती है, परंतु वजन कम होने पर यह सिकुड़ती नहीं। इससे त्वचा ढीली और कांतिहीन हो जाती है। विटामिन 'ए' व जस्ता सामान्य एवं स्वस्थ त्वचा के लिए जरूरी पोषक तत्व हैं। विटामिन 'ए' त्वचा की मृत कोशिकाओं को छाँटकर खुश्की भगाता है तथा जस्ता स्वयं सुधार की क्षमता बढ़ाता है। हरी पत्तियों वाली सब्जियों में बीटा-केरोटीन नामक तत्व काफी मात्रा में पाया जाता है। इसके सेवन के उपरांत शरीर में यह बीटा-कैरोटीन विटामिन 'ए' में बदल जाता है। पालक, मैथी, चौलाई और सेलेरी जैसी पत्तेदार सब्जियाँ इस मायने में बहुत लाभकारी और पोषक गुणों से भरपूर होती है। इनमें कैल्शियम लौह तत्व विटामिन 'सी' फोलिक एसिड व अन्य पोषक तत्व भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
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