-सुमन नामदेव
तनाव किसी भी जहर से कम नहीं होता। यह मानव शरीर को धीरे-धीरे नष्ट करता है। तनावग्रस्त रहने वाला व्यक्ति मानसिक रोगों से ही नहीं, बल्कि कई बीमारियों का शिकार भी हो जाता है। आइए तनाव से मुक्त होने के कुछ उपाय जानें:-
*स्वयं को न तो कमजोर मानें और न ही इसे स्वीकारें। अपनी छोटी सफलता को भी अनदेखा न करें। स्वयं को शाबाशी दें। इसका तात्पर्य यह नहीं है कि छोटी-सी सफलता पर आप गर्वित हो उठें, बल्कि आत्मविश्वास की पूँजी और एकत्रित कर लें।
*एक लंबे अरसे के बाद परिणाम देने वाले कार्यों के साथ-साथ जल्दी परिणाम देने वाले कार्य भी करते रहें ताकि तनाव से बचे रहें।
*बिना सोचे-विचारे कार्य करने से भी तनाव उत्पन्न होता है, अतः सोच-विचार कर कार्य या लक्ष्य चुनना चाहिए।
*जिस कार्य या समस्या का हल आपके वश में न हो तो उसे समय की धारा पर छोड़ देना ही बेहतर है।
*रुचिपूर्ण कार्य करने, संगीत सुनने या घूमने से भी तनाव दूर होता है।
*कभी किसी से झगड़ा न करें। यदि ऐसी स्थिति आ जाए तो समझौता करने की कोशिश करें। इससे आप तनावग्रस्त होने से बच सकते हैं।
*बेवजह बिना सबूत के किसी पर शक न करें, क्योंकि शक भी किसी जहर से कम नहीं है। शक करने से तनाव उत्पन्न होता है। संबंध बिगड़ जाते हैं, परिवार में दरार पैदा हो जाती है।
*घर का सारा काम करने के चक्कर में यदि कोई कार्य अधूरा रह जाता है तो ज्यादा परेशान न हों।
*यदि किसी कारणवश ज्यादा परेशानी से तनाव आ जाए तो उस समय धैर्य से काम लें।
*ज्यादा बोझ वाले काम न करें, क्योंकि इससे थकावट आती है और परेशानी बढ़ती है। बीच-बीच में थोड़ा विश्राम भी करें।
*मनोचिकित्सकों का कहना है कि हाथ पर हाथ रखकर समस्या का हल नहीं होता। इससे तनाव और बढ़ता है, अतः तनाव का मूल स्रोत जानकर उससे मुकाबला करने का दृढ़ निश्चय शक्ति बढ़ाता है और इसी से सफलता प्राप्त होती है।
*दूसरों से मेलजोल रखने, आपसी संबंध बनाने से आप तनावमुक्त रह सकते हैं, क्योंकि अपने सुख-दुःख बाँटने से तनाव काफी हद तक कम | हफ्ते में कम-से-कम एक बार किसी से खुलकर बात करें, लेकिन आप की बातों में सच्चाई अवश्य होनी चाहिए |
| |
हो जाते हैं। हफ्ते में कम-से-कम एक बार किसी से खुलकर बात करें, लेकिन आप की बातों में सच्चाई अवश्य होनी चाहिए। ध्यान रखें कि बातचीत के समय जीवंतता बनी रहे तथा माहौल बोझिल न हो।
*सामाजिक आदान-प्रदान एक सीमा तक रखें, क्योंकि इससे आप तनावग्रस्त हो सकती हैं। कभी-कभी अधिक सहानुभूति भी बोझ लगने लगती है जो कि तनाव का कारण हो सकती है, अतः ऐसी स्थिति से भी बचें।
*यदि आपको ऐसा लगता है कि आपका कोई ऐसा नहीं है जिसके साथ आप अपने दुःख-सुख बाँट सकें तो एक अंशकालिक कार्य शुरू करें जो आपको शांति दे।
|