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अपने दिल की बात सुनें
(विश्‍व हृदय दिवस विशेष)
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प्रत्येक वर्ष 15 लाख से अधिक भारतीय हृदय की कोरोनरी धमनियों की बीमारियों के कारण असमय ही मृत्यु का शिकार हो जाते हैं। बुढ़ापे में होने वाली हृदयाघात की समस्या अब 10 वर्ष जितनी कम उम्र के बच्चों में भी देखने को मिल रही है। 20 वर्ष के युवा दिलों की धमनियों में भी अवरोध (ब्लॉक्स) उत्पन्न हो रहे हैं। जानते हैं इसका प्रमुख कारण है- हमारी दोषपूर्ण जीवन शैली। कोरोनरी धमनियों की खराबी के लिए प्रमुख रूप से मोटापा, धूम्रमान व उच्च रक्तचाप जैसे कारण जिम्मेदार होते हैं। नियमित शारीरिक व्यायाम, आउटडोर या मैदानी खेल, संतुलित आहार और तनावमुक्त जीवन शैली दिल की बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं, लेकिन इनके प्रति हमारा कितना रुझान है? क्या अब समय नहीं आ गया है कि हम अपने दिल की बात सुनें, स्वयं जागृत हों एवं अपने परिवार व परिजनों को भी जागृत करें।

प्रतिवर्ष 30 सितंबर को मनाया जाने वाला विश्व हृदय दिवस भी आपको बस यही याद दिलाना चाहता है। अपने दिल को डूबने न दें, उसकी धड़कनों में जीवन का संगीत सुनें और इसके लिए अपनी जीवन शैली में बड़े छोटे-छोटे से मगर अत्यंत महत्वपूर्ण व उपयोगी परिवर्तन करें।

- प्रधान संपादक (नईदुनिया)
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