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जब बढ़ने लगे खून का दवाब
-डॉ. राजेश पी. माहेश्वर

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उच्च रक्तचाप वैसे तो किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन आम तौर पर चालीस वर्ष के बाद यह बीमारी देखी जाती है। इसके मरीज दिल के दौरे के शिकार भी हो सकते हैं। इसी के कारण पक्षाघात जैसी खतरनाक बीमारियाँ भी हो सकती हैं। रक्तचाप दो हिस्सों में नापा जाता है-डायस्टोलिक और सिस्टोलिक। हमारा दिल हर समय धड़कता रहता है। लगभग प्रत्येक सेकंड में एक बार हृदय सिकुड़ता है, जिससे हमारी खून की धमनियों में रक्तचाप बढ़ जाता है। यही डायस्टोलिक रक्तचाप होता है। अगले ही क्षण हमारा दिल आराम करता है तो रक्तचाप कम हो जाता है। यह सिस्टोलिक रक्तचाप होता है। इसी प्रक्रिया के चलने से हमारी जीवन की गाड़ी चलती है।

बच्चों में धमनियाँ बहुत कोमल होती हैं। इसलिए उनमें रक्त प्रवाह अच्छे ढंग से होता है और रक्तचाप 60/40 से 90/50 तक रहता है। उम्र के बढ़ने के साथ धमनियाँ कठोर होती जाती हैं और रक्तचाप बढ़ता जाता है। एक वयस्क व्यक्ति में रक्तचाप सामान्यतः 120/80 होता है। डॉक्टरों के अनुसार यदि रक्तचाप 140/90 को पार कर जाए तो इसका मतलब वह व्यक्ति उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) का शिकार होने वाला है। अगर रक्तचाप 120/80 से कम हो जाता है तो इसे निम्न रक्तचाप कहते हैं। यह भी घातक होता है। कभी-कभी रक्तचाप का बढ़ना खतरनाक नहीं होता है लेकिन लगातार उच्च रक्तचाप रहने लगे तो तुरंत उपचार नहीं करने पर आँखों की रोशनी, गुर्दे एवं पाचन क्रिया पर प्रभाव पड़ सकता है।

उच्च रक्तचाप के प्रकार : पहला रीनल हाइपरटेशन होता है, जो गुर्दे में बनने वाले एक रसायन के कारण होता है। इस प्रकार का हाइपरटेंशन किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। दूसरी प्रकार के हाइपरटेंशन का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है परंतु इसके बढ़ने में हमारे मानसिक तनाव की भूमिका अधिक रहती है। लगातार मानसिक तनाव रहने से रक्त प्रवाह बुरी तरह प्रभावित होता है। इसके कारण उच्च व निम्न दोनों तरह का रक्तचाप हो सकता है।

हाइपरटेंशन के कारण : नमक का ज्यादा सेवन, कोलेस्ट्रॉल की मात्रा खून में बढ़ना, सिगरेट, चाय-कॉफी का अधिक सेवन रक्तचाप को बढ़ाता है। नमक शरीर के लिए अति आवश्यक है परंतु आधा ग्राम रोजाना, जबकि अधिकतर लोग रोजाना बीस ग्राम तक नमक खाते हैं। यदि हम नमक का सेवन कम करें तो किसी हद तक हाइपरटेंशन जैसी घातक बीमारी पर काबू पाया जा सकता है। ज्यादा वसायुक्त भोजन खाने से हमारे शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने लगता है। यही बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल हमारी खून की नलियों (धमनियों) की दीवारों पर जम जाता है और रक्त के प्रवाह में रुकावट डालता है। यह रुकावट हमारे रक्तचाप को बढ़ाती है।
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