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मोटापे को न दें निमंत्रण
-प्रीति सेलो

मोटापा न केवल खूबसूरती का दुश्मन है,बल्कि कई रोगों का घर है। मोटापा विभिन्न रोगों को निमंत्रण भी देता है। मोटापा एक ऐसा रोग है जो बहुत प्रयत्न के बाद भी शायद ही पीछा छोड़े। खान-पान, रहन-सहन में थोड़ी-सी लापरवाही मोटापे का द्वार खोल देती है। प्रारंभ में तो अनजाने से ही ऐशोआराम की मानसिकता के तहत हम स्वयं ही मोटापे को बुलावा देते हैं। बाद में किताबों में पढ़कर, कहीं से सुनकर उससे छुटकारा पाने के तरीके आजमाते हैं। वॉशिंग मशीन, मिक्सर, गैस व काम करने वाली महरियों की बदौलत शरीर पर चर्बी की परत-दर-परत जमा होती जाती है। सुविधाओं के हम इतने आदी हो चुके हैं कि इसका परिणाम जानते हुए भी आरामतलब जिंदगी छोड़ना नहीं चाहते।

सुंदर-छरहरी काया, सुडौल कमर, भला किसे अच्छी नहीं लगती। लेकिन इसके लिए प्रयत्न आवश्यक है। व्यायाम, शारीरिक श्रम व जिव्हा पर नियंत्रण रखकर हम काफी हद तक मोटापे को रोक सकते हैं। आचार-व्यवहार, रहन-सहन पर अंकुश लगाए बगैर हम छरहरे नहीं रह सकते। स्वास्थ्यप्रद क्रियाकलापों को हम अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें तो मोटापे से बचा जा सकता है। मोटापे के संदर्भ में कुछ ध्यान रखने योग्य बातें निम्न हैं :-

नियमित व्यायाम, खेलकूद, तेज चाल से घूमना, शरीर के आकार व वजन को संतुलित रखता है। खेलकूद व व्यायाम का पर्याय शारीरिक श्रम है। घरेलू कार्य- पोंछा लगाना, सफाई करना, कपड़े धोना आदि से पर्याप्त श्रम हो जाता है और चर्बी नहीं चढ़ती।

व्यापार, दफ्तर अथवा घरेलू कार्यों से निपटने के बाद बिस्तर से न चिपकें। हालाँकि सोना, आराम करना अच्छा लगता है। लेकिन कुछ दिनों बाद ही इसके दुष्परिणाम सामने आने लगते हैं। अपने खाली समय में बुनाई, कढ़ाई, पेंटिंग, लेखन या अन्य रचनात्मक कार्य करें। इससे रचनात्मकता में वृद्धि के साथ लोगों में मोटापा भी नहीं बढ़ेगा।

कई लोगों की आदत दिनभर कुछ न कुछ खाने की होती है। फुर्सत में बैठे हैं तो खाना, टी.वी. देखते देखते खाना। कुछ व्यक्ति दूसरों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने अथवा अपनी कुंठा को दूर करने के लिए भी कुछ न कुछ खाते रहते हैं। वजह चाहे जो कुछ हो, दिनभर खाने से चर्बी तो बढ़ती ही है, चयापचय की क्रिया भी शिथिल होती है।
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