गलत ढंग से आहार-विहार यानी खान-पान रहन-सहन से जब शरीर पर चर्बी चढ़ती है तो पेट बाहर निकल आता है, कमर मोटी हो जाती है और कूल्हे भारी हो जाते हैं। इसी अनुपात से हाथ-पैर और गर्दन पर भी मोटापा आने लगता है। जबड़ों के नीचे गरदन मोटी होना और तोंद बढ़ना मोटापे के मोटे लक्षण हैं।
मोटापे से जहां शरीर भद्दा और बेडौल दिखाई देता है, वहीं स्वास्थ्य से सम्बंधित कुछ व्याधियां पैदा हो जाती हैं, लिहाजा मोटापा किसी भी सूरत में अच्छा नहीं होता। बहुत कम स्त्रियां मोटापे का शिकार होने से बच पाती हैं। हर समय कुछ न कुछ खाने की शौकीन, मिठाइयां, तले पदार्थों का अधिक सेवन करने वाली और शारीरिक परिश्रम न करने वाली स्त्रियों के शरीर पर मोटापा आ जाता है।
प्रायः प्रसूति के बाद की असावधानी और गलत आहार-विहार करने से स्त्रियों का पेट बढ़ जाया करता है। गर्भकाल में जो स्त्रियां नाखून से पेट खुजाया करती हैं, उनके पेट पर धारियां पड़ जाती हैं। प्रसव के बाद 40 दिन तक पेट बांधकर रखने से पेट बड़ा नहीं हो पाता। पेट बांधने के बेल्ट बाजार में मिलते हैं। पहली कोशिश तो यही करना चाहिए कि पेट बढ़ने ही न पाए, क्योंकि एक बार पेट बढ़ जाने पर कम करना कठिन और समय साध्य कार्य हो जाता है। इसके लिए दो तीन बातों का ध्यान रखना जरूती है।
* प्रायः महिलाएं भोजन करके खूब पानी पिया करती हैं। इस विषय में निरोगधाम मे अंकों में विस्तार से यह बताया जा चुका है कि भोजन के अन्त में पानी पीना उचित नहीं, बल्कि एक-डेढ़ घण्टे बाद ही पानी पीना चाहिए। इससे पेट और कमर पर मोटापा नहीं चढ़ता, बल्कि मोटापा हो भी तो कम हो जाता है।
* आहार भूख से थोडा कम ही लेना चाहिए। इससे पाचन भी ठीक होता है और पेट बड़ा नहीं होता। पेट में गैस नहीं बने इसका खयाल रखना चाहिए। गैस के तनाव से तनकर पेट बड़ा होने लगता है। दोनो समय शौच के लिए अवश्य जाना चाहिए।
* भोजन में शाक-सब्जी, कच्चा सलाद और कच्ची हरी शाक सब्जी की मात्रा अधिक और चपाती, चावल व आलू की मात्रा कम रखना चाहिए।
* सप्ताह में एक दिन उपवास या एक बार भोजन करने के नियम का पालन करना चाहिए। उपवास के दिन सिर्फ फल और दूध का ही सेवन करना चाहिए।
* पेट व कमर का आकार कम करने के लिए सुबह उठने के बाद या रात को सोने से पहले नाभि के ऊपर के उदर भाग को 'बफारे की भाप' से सेक करना चाहिए। इस हेतु एक तपेली पानी में एक मुट्ठी अजवायन और एक चम्मच नमक डालकर उबलने रख दें। जब भाप उठने लगे, तब इस पर जाली या आटा छानने की छन्नी रख दें। दो छोटे नैपकिन या कपड़े ठण्डे पानी में गीले कर निचोड़ लें और तह करके एक-एक कर जाली पर रख गरम करें और पेट पर रख कर सेकें। प्रतिदिन 10 मिनट सेक करना पर्याप्त है। कुछ दिनो में पेट का आकार घटने लगेगा।
|