भारत में हर मिनट में एक बच्चा निमोनिया की भेंट चढ़ जाता है। निमोनिया के विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि अगर केंद्र सरकार ने निमोनिया से बचाव को प्राथमिकता नहीं दी तो वह बाल मृत्यु दर में दो-तिहाई कटौती के अपने मिलेनियम लक्ष्य से पिछड़ जाएगा। टीकाकरण में सरकार ने निमोनिया से बचाव की जो रणनीति अपनाई है, वह आधी-अधूरी है। निमोनिया से बाल मौतों में हो रही लगातार वृद्धि को देखते हुए पूरी दुनिया में पहली बार 2 नवंबर को विश्व निमोनिया दिवस मनाया गया।
भारत सहित एशिया के अन्य देशों पर निमोनिया की मार सबसे अधिक है। निमोनिया से लड़ने के लिए बनी संस्था एशियन स्ट्रेटेजिक अलायंस फॉर न्यूमोकोकल डिजीज प्रीवेंशन (एएसएपी) के भारत चैप्टर के चेयरमैन डॉ. नितिन शाह ने कहा कि भारत में दो बैक्टीरिया से बच्चों को होने वाले जानलेवा निमोनिया को टीके से रोका जा सकता है। स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया एवं हीमोफीलियस इंफ्लूएंजा टाइप टू (एचबी) को भारत में निमोनिया के बड़े कारणों में शुमार किया गया है। डॉ. शाह ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने फाइव इन वन (पेंटावेलेंट) टीके की शुरुआत कर निमोनिया को रोकने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाया है।
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टीके से निमोनिया का एक कारक बैक्टीरिया हीमोफीलियस इंफ्लूएंजा टाइप बी (हिब) से बचाव हो जाएगा। इस बैक्टीरिया से मेनिंगजाइटिस भी होता है, लेकिन इससे स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया से होने वाले निमोनिया या अन्य रोगों से बचाव नहीं होगा। सरकार को इसके लिए न्यूमोकॉकल कंजुगेट वैक्सीन (पीसीवी) को टीकाकरण में शामिल करना होगा।
पूरी दुनिया के 50 से अधिक बाल स्वास्थ्य संगठनों ने 2 नवंबर को विश्व निमोनिया दिवस मनाया। इस मौके पर विशेषज्ञों ने कहा कि निमोनिया को रोकने या ठीक करने का साधन तो है, लेकिन फिर भी हर साल 5 साल से नीचे के 20 लाख बच्चे मर जाते हैं।