एक सामान्य मनुष्य में 5 से 6 लीटर रक्त होता है। रक्तदान के दौरान मात्र 300 मिलीलीटर रक्त लिया जाता है। शरीर इस रक्त की आपूर्ति मात्र 24 से 48 घंटे में कर लेता है।मनुष्य के शरीर में वजन का 7 प्रतिशत रक्त होता है।एक यूनिट रक्त के माध्यम से तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है।सबसे ज्यादा पाए जाने वाला ब्लड ग्रुप 'ओ' है तथा 'एबी-निगेटिव' सबसे कम पाया जाता है।वर्ष 2007 में वैज्ञानिकों ने एंजाइम्स के प्रयोग से ब्लड ग्रुप ए, बी, एबी को 'ओ' में बदलने में सफलता प्राप्त कर ली थी, परंतु अभी इसके मनुष्यों पर प्रयोग होना बाकी है।विकासशील व गरीब देशों में रक्तदान के पश्चात भी दान किए हुए रक्त का 45 प्रतिशत ही सहेजा जा रहा है। अगर किसी देश की जनसंख्या का मात्र 1 से 3 प्रतिशत भी रक्तदान करता है तो वह उस देश की जरूरत पूरी कर सकता है, परंतु विश्व के 73 देशों में जनसंख्या के 1 प्रतिशत से भी कम लोग रक्तदान करते हैं।विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार स्वैच्छिक रक्तदाताओं के मुकाबले खरीदा हुआ रक्त नहीं लेना चाहिए। आँकड़े ये बताते हैं कि स्वैच्छिक रक्तदाताओं द्वारा दिया गया रक्त न केवल मरीजों पर अच्छा असर करता है बल्कि इसमें एचआईवी तथा हेपेटाइटिस वायरस के होने की आशंका भी कम रहती है। |