यह एक 67 साल की महिला का केस है जो पिछले 35 सालों से दमा से पीड़ित थीं। अक्सर इनका रोग इतना तीव्र हो जाता था कि हर छः महीने में इन्हें 20-22 दिन अस्पताल में भर्ती होना पड़ता था। | | किसी ने कहा कि यह बीमारी शरीर में कीड़े होने के कारण होती है और घासलेट पीने से ठीक होती है। इस महिला ने तकलीफ से निजात पाने के लिए घासलेट तक पिया। किसी ने सुझाया कान छिदवाने से दमा दूर होता है तो दोनों तरफ के कान सात-सात जगह से छेद दिए गए। |
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एमवाय अस्पताल से लेकर शहर का एक भी निजी या सरकारी अस्पताल ऐसा नहीं बचा था,जहाँ ये इलाज के लिए भर्ती नहीं हुई थीं। मरीज पर हर तरह की दवाओं का प्रयोग हो चुका था लेकिन हर प्रयास बेकार साबित हुआ। एक जमाने में दमे के इलाज में एड्रीनलीन के इंजेक्शन लगाए जाते थे।
इन्होंने वे भी लगवाए। किसी ने कहा कि यह बीमारी शरीर में कीड़े होने के कारण होती है और घासलेट पीने से ठीक होती है। इस महिला ने तकलीफ से निजात पाने के लिए घासलेट तक पिया। किसी ने सुझाया कान छिदवाने से दमा दूर होता है तो दोनों तरफ के कान सात-सात जगह से छेद दिए गए। किसी ने बताया कि गुरुपूर्णिमा पर खीर खाने से यह रोग दूर होता है तो वह भी करके देख लिया। गरज यह कि मरीज ने आयुर्वेदिक, यूनानी, सिद्धा, एक्यूपंक्चर वगैरह सब तरह के इलाज करा लिए, लेकिन बीमारी अपनी जगह पर बनी रही। इसी सिलसिले में उसने अपने सीने पर एक्यूपंक्चर के तार तक लगवा लिए। इस तरह 15-17 साल तक इलाज चलता रहा। परेशानी थी कि थमने का नाम ही नहीं ले रही थी।
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