मुख्य पृष्ठ > विविध > सेहत > जान है, जहान है
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
आँखों की हर साल कराएँ जाँच
क्या है इलाज

डायबिटीज से जुड़ी आँखों की अधिकांश समस्याओं का निदान लेजर ट्रीटमेंट से किया जा सकता है। लेजर की बीम निहायत एहतिहात से ठीक उन्हीं रक्त नलिकाओं पर केंद्रित की जाती है जो क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और उनसे द्रव बाहर आकर रेटीना में रिसने लगा है। लेजर बीम फूट चुकी नलिकाओं को सील कर देती है। यदि नई रक्त नलिकाएं बनने लगी हैं तो वे भी लेजर ट्रीटमेंट से सील की जा सकती हैं। दस में आठ केसेस में लेजर ट्रीटमेंट से नई रक्त नलिकाओं का बनना रुक जाता है।

डायबिटीज छोटी उम्र में भी शुरु हो सकती है लेकिन अक्सर यह बड़ी उम्र के लोगों में पाई जाती है। यह दो तरह की होती है- पहली जिसे इंसुलीन के इंजेक्शन के साथ नियंत्रित करना पड़ता है तथा दूसरी वह जिसे खानपान पर नियंत्रण करके अथवा गोलियां खाकर काबू मेंरखा जा सकता है। डायबिटीज किसी भी तरह की क्यों न हो इसका आँखों पर असर एक सरीखा पड़ता है। जो 5-20 साल से डायबिटीज से पीड़ित हैं उनके परदे के क्षतिग्रस्त होने के अवसर 80 प्रतिशत से अधिक हैं। यह प्रतिशत नियमित रूप से साल में केवल एक बार आँखों की जांच केबाद ही नीचे लाया जा सकता है। हर जांच का एक फोटो लेकर रेकार्ड रखा जाता है जिसकी तुलना दूसरी जांच के दौरान खींचे गए फोटो से की जाती है। इससे हर जांच के बाद यह पता लगता है कि एक साल के दौरान कितनी क्षति हो चुकी है। फ्लोरोसिन एंजियोग्राफी मशीन से बीमारी को प्रारंभिक अवस्था में ही पकड़ा जा सकता है।
<< 1 | 2 
और भी
संभालें दूध के दाँत
मन की शक्ति जीती
कम्प्यूटर सिन्ड्रॉम से निपटने के उपाय
2007 का सेहत
खर्राटे करते हैं नींद हराम
प्रसूति से जुड़ी भ्रांतियाँ