उन्हें सौंपे गए काम के अनुसार उनका रूप और उनकी बनावट अलग-अलग होती है। दूध के दाँतों का बहुत महत्व है। ये दाँत बच्चे को चबाने और बोलने में सहायक होते हैं। भविष्य में पक्के दाँतों के लिएजगह भी यही दाँत बनाते हैं। इसलिए इनकी देखरेख करना बहुत जरूरी है। आगे चलकर यही बत्तीसी भी नींव बनाते हैं।
भ्रांतियाँ * दाँत आने के वक्त स्तनपान नहीं कराना चाहिए। * दाँत आगे के समय हल्का बुखार आना, दस्त लगना एक असामान्य घटना है। * दाँत आने के वक्त मसूड़ों पर दर्द निवारक दवा (जैल) लगाना चाहिए। * दाँ आसानी से आ जाएँ, उसके लिए सायरप या इंजेक्शन देना चाहिए। * दूध के दाँत अगर सड़ने लग जाएँ तो इलाज नहीं करवाना चाहिए क्योंकि वह तो गिर जाएँगे।
दाँतों की सही देखभाल * शिशु को दूध पिलाने के बाद मुलायम कपड़े से मसूड़ों को साफ करना चाहिए। * रात को बॉटल से दूध नहीं पिलाना चाहिए। * पेसीफायर (बिटनी) का उपयोग नहीं करना चाहिए। * दूध के दाँत में अगर सड़न लगने लगे तो तुरंत उपचार करवाना चाहिए। * सही तरीके से ब्रश करने की आदत डालें। * दूध के दाँत यदि जल्दी गिरने लगे या बहुत देरी से आएँ तो, डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। यह असामान्य है। * दाँत निकलते समय तेज बुखार हो या ज्यादा दस्त लगे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
दाँत कुदरत की अनमोल देन है। इसकी हिफाजत जन्म के समय से शुरू कर देना चाहिए। सुंदर दाँत माला में गुँथे मोतियों की तरह आकर्षक दिखाई देते हैं और आपके बच्चों के व्यक्तित्व को चार चाँद लगा देते हैं।
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