मुख्य पृष्ठ > विविध > सेहत > जान है, जहान है
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
मन की शक्ति जीती
आयकुड़ी का चमत्कार
उस असहाय परिस्थिति में उनके दिलो-दिमाग में एक संस्था की स्थापना का विचार आया। वे चाहते थे कि पोलियो से ग्रस्त या हादसे में विकलांग हुए बच्चों के लिए विद्यालय और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो। अंतरराष्ट्रीय विकलांग वर्ष में जून 1981 में उन्होंने 'अमर सेवा संघ' की स्थापना और रजिस्ट्रेशन करवाया

उनके घर के पास एक छोटे-से कमरे से प्रारंभ हुआ यह संघ कई मायने में अद्वितीय है। संघ के नाम पर दृष्टिपात करें। पौने दो वर्ष आर्मी अस्पताल में इलाज के दौरान रामकृष्णन के कई डॉक्टरों में से एक थे डॉ. अमरजीतसिंह चहल। उनका रामकृष्णन के प्रति विशेष स्नेह और विश्वास था। वे हमेशा कहा करते थे, 'रामकृष्णन, आशा और हौसला कभी मत छोड़ना, तुम अवश्य ही कुछ करोगे।'

'अमर सेवा संघ' में पोलियोग्रस्त बच्चों को लाया गया। उनकी चिकित्सा, शिक्षा के बाद कैलिपर्स बनवाकर चलने में मदद की गई

10 वर्ष तक संघ के लिए अध्यक्ष रामकृष्णन व स्वेच्छा से कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं ने दिन-रात एक करके जनसेवा की मिसाल कायम की। फिर तमिल की अंतरराष्ट्रीय स्तर की लेखिका शिवशंकरी को किसी परिचित से रामकृष्णन के हादसे और हौसले की बात का पता लगा। वे आयकुड़ी जाकर उनसे मिलीं

वहाँ की गतिविधियाँ देख बहुत उद्वेलित हुईं। उन्होंने विस्तारपूर्वक सारी बातों का खुलासा करते हुए एक तमिल साप्ताहिक में भावपूर्ण लेख लिखा। शिवशंकरी के लेख का तो अद्भुत प्रभाव पड़ना ही था। एक गुमनाम-सा गाँव लोगों के आवागमन और चंदे की रकम से भरपूर हो गया। इसी के साथ चेन्नई दूरदर्शन पर शिवशंकरी द्वारा बनाया हुआ वृत्तचित्र 'ए फेस इन द क्राउड' भी दिखाया गया

फिर तो देशी-विदेशी पत्रकारों में मानो होड़ ही लग गई। भावपूर्ण लेखों की श्रृंखला ने रामकृष्णन के हौसले, धैर्य और चातुर्य को लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्पद बना दिया। रामकृष्णन ने किसी से स्वयं के लिए आर्थिक मदद कभी नहीं ली, परंतु संघ के लिए वे सदा मदद की गुहार करते। उन्होंने जिन क्रियाकलापों की कल्पना की थी, उन सबके लिए धनागमन होने लगा

कोलकाता में इलाहाबाद बैंक में एक उच्च पदस्थ अफसर श्रीनिवासन की पत्नी सुलोचना ने पत्र-पत्रिकाओं में रामकृष्णन के बारे में पढ़कर मदद करनी चाही, और की।जब बड़ी जगह की दरकार हुई तो सुलोचनाजी से ही उन्होंने गुहार लगाई। सुलोचनाजी ने न सिर्फ राशि से मदद की वरन भूमि खरीदने में भी मदद की। इसीलिए 'अमर सेवा संघ' का पता सुलोचना गार्डन्स रखा गया। यहाँ 1991 में भवन बनना प्रारंभ हुआ और 1992 में विद्यालय व अन्य कार्य बड़े पैमाने पर यहाँ चलने लगे।

संघ के विस्तार और कार्यकलापों को देखकर कोई भी चकित रह जाएगा। सिर्फ रुपए का आगमन ही सब कुछ नहीं होता। उसका दूरदृष्टि के साथ ही सही उपयोग करना बहुत बड़ी कला है। रामकृष्णन इस कला में माहिर हैं। अपनी शारीरिक परेशानी के बावजूद गाड़ी में प्रतिदिन संघ के ऑफिस आना, हिसाब-किताब, हर विभाग की देखभाल, कार्यकर्ताओं व वैतनिक कर्मचारियों से बातचीत के अलावा बच्चों से घिर जाना और बातें तथा चुहलबाजी करना उनकी दिनचर्या है। संघ और संघ के अध्यक्ष रामकृष्णन यहाँ के बच्चों और बड़ों (शारीरिक रूप से अक्षम) को स्वाभिमान से जीना सिखा रहे हैं। इन लोगों के चेहरे पर हीनभावना के चिन्ह या चेहरे पर शिकायत का चिरस्थायी नोटिस विद्यमान नहीं रहता है। व्हील चेयर पर हो या घिसटकर चलते, चेहरे पर सहज दोस्ताना मुस्कान ही होती है।

5.32 एकड़ में फैले 'अमर सेवा संघ' में 1992 में एक और इसी तरह के विलक्षण व्यक्तित्व का आगमन हुआ। ये हैं शंकररामन जो जन्म से मस्क्युलर डिस्ट्रोफी के शिकार हैं। परंतु इनकी शारीरिक कमी को इनके माता-पिता के हौसले व इनके स्वयं के बुद्धि-चातुर्य ने मात देदी

घर पर शिक्षक से शिक्षा ग्रहण कर उच्च शिक्षा के लिए स्कूल, कॉलेजों में अनेक विरोधों व अड़चनों को पार कर शिक्षा दिलवाई। सीए की परीक्षा में पहले प्रयत्न में सामान्य छात्र के रूप में प्रथम रहना साधारण-सी बात नहीं है। प्रेक्टिस अच्छी चल रही थी, तभी 'अमर सेवा संघ' तथा रामकृष्णन के बारे में पढ़ा-सुना। शंकररामन के मन में जनसेवा का जज्बा था ही और वे कहीं सेवा कार्य से जुड़ना चाह रहे थे। 'अमर सेवा संघ' का जानकर उन्हें मानो अपना ठिकाना मिल गया। सन्‌ 1992 में ये दोनों विलक्षण व्यक्तित्व एक-दूसरे से मिले तथा संघ को एक और एक ग्यारह की ताकत मिल गई।

इसी गाँव की चित्रा नामक युवती संघ के बच्चों को पढ़ाती और संगीत सिखाती थी। इसके संगीत ने रामकृष्णन को आकर्षित किया। चित्रा उनकी सहायिका (पत्र लिखना, ऑफिस का काम करना) भी रहीं। 1994 में रामकृष्णन से विवाह करके सही अर्थों में वे उनकी अर्द्धांगिनी हो गई।
<< 1 | 2 | 3  >>  
और भी
कम्प्यूटर सिन्ड्रॉम से निपटने के उपाय
2007 का सेहत
खर्राटे करते हैं नींद हराम
प्रसूति से जुड़ी भ्रांतियाँ
मधुमेह की समस्‍याएँ
अलग-अलग बुखारों के लिए जाँचें