- डॉ. प्रमोद झंवर
सोते समय शरीर की समस्त मांसपेशियाँ कुछ शिथिल हो जाती हैं। शरीर के अधिकांश अंगों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि इससे शरीर को आराम मिलने और अच्छी नींद आने में मदद मिलती है। जीन के पीछे श्वास नली (गले) को खुला रखने में सहजिक मांसपेशियों के शिथिल होने के कारण श्वास नली गंभीर रूप से सिकुड़ जाती है और वायु मार्ग सँकरा हो जाता है। सामान्य व्यक्तियों में भी इससे साँस अंदर खींचते समय वायु के प्रवाह का गतिरोध बढ़ जाता है, किंतु आमतौर पर यह महत्वपूर्ण नहीं है। जब नींद में श्वास नली सामान्य से अधिक सँकरी हो जाए तो जीभ के पीछे का वायु मार्ग और ज्यादा तंग हो जाता है और जब वायु मार्ग बिलकुल बंद हो जाता है तो साँस रुक जाती है, जिसे 'श्वासरोध' कहा जाता है। सौभाग्य से हमारे शरीर में साँस लेने में अधिक कठिनाई को समझने की क्षमता होती है और इससे पहले की खर्राटे लेने वाले व्यक्ति का दम घुटने लगे, उसकी नींद खुल जाती है। वह कुछ लंबी-लंबी साँस लेने लगता है और तुरंत गहरी नींद में सो जाता है।
श्वास अवरोध के कारण
सोते समय श्वास नली सामान्य से अधिक सँकरी होने के कारण साँस कट जाती है। टांसिलों के बढ़ जाने या निचले जबड़े के दोष के कारण वायु मार्ग अधिक सँकरा होकर ऑक्सीजन के प्रवाह को रोक सकता है। साँस अंदर लेते समय नाक के आंशिक रूप से बंद होने के कारण गले के निचले हिस्से पर दबाव पैदा होता है, जिससे श्वास नली की दीवारें एक-दूसरे के और पास आ जाती हैं।
श्वासरोध के शिकार व्यक्ति
जोर-जोर से खर्राटे लेने और नींद में साँस रुकने की बीमारी अधिकांश भारी-भरकम शरीर और साधारणतः 17 इंच या उससे अधिक मोटी गर्दन वाले बुजुर्गों में देखी जाती है। कुछ रोगियों के मामले में इस रोग का कारण समझना कठिन होता है। बच्चों में टांसिल बढ़ने केकारण आमतौर पर यह रोग होता है। इसके इलाज के लिए आजकल छोटे बच्चों में टांसिल का ऑपरेशन कराने की सिफारिश की जाती है। नींद में साँस रुकना और जोर-जोर से खर्राटे भरना गहरी नींद में बाधक होता है। प्रति एक हजार व्यक्तियों में कम से कम तीन व्यक्ति श्वास अवरोध के रोग से गंभीर रूप से पीड़ित होते हैं।
नींद में साँस रुकने के लक्षण
वायु मार्ग में रुकावट के कारण रोगी को थोड़े समय के लिए जागना पड़ता है, जिससे नींद उचट जाती है। इस कारण रोगी को दिन में नींद | | जोर-जोर से खर्राटे लेने और नींद में साँस रुकने की बीमारी अधिकांश भारी-भरकम शरीर और साधारणतः 17 इंच या उससे अधिक मोटी गर्दन वाले बुजुर्गों में देखी जाती है |
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आती रहती है। ऐसे व्यक्तियों की एक प्रकार से नींद पूरी नहीं होती, जिसकी कमी शरीर जरा-सा भी मौका मिलने पर सोकर पूरी करने की कोशिश करता है। आरंभ में केवल पढ़ने, टेलीविजन देखने और मोटर मार्गों पर वाहन चलाते समय ऐसा होता है, लेकिन जब नींद का असर ज्यादा होने लगता है तो खाना खाते-खाते या बात करते-करते मरीज सो जाता है। कार्यक्षमता में कमी के कारण रोगी अपनी नौकरी से हाथ धो सकता है।
सोते समय श्वास अवरोध का निदान
नींद में श्वासरोध का संदेह होने पर निदान की पुष्टि के लिए नींद संबंधी अध्ययन लिए जाते हैं। रोगी के सोते हुए, बिना किसी कष्टदायक युक्ति या उपकरण के उपयोग से इस रोग के अनेक लक्षणों का पता लगाया जा सकता है। सिर पर इलेक्ट्रोड लगाकर या नींद के दौरान शरीर की अनेक क्रियाओं से अनुमान लगाया जा सकता है कि नींद कैसी है।
उपचार
यदि अधिक खर्राटे नहीं आते हैं तो थोड़ा वजन कम कर, शाम 6 बजे के बाद शराब न पीना, नाक को यथासंभव साफ रखना, पर करवट या किसी टेक के सहारे सोने जैसे साधारण उपायों के रोग से उपचार में सहायता मिल सकती है। आजकल ऐसे आसान उपकरण, जिनसे खर्राटों मेंकाफी कमी आ सकती है। यदि खर्राटे अत्यधिक आपत्तिजनक हो जाएँ तो रोगी के गले के पीछे की तरफ ऑपरेशन करने से आराम मिल सकता है, लेकिन यह अंतिम उपाय है और यह केवल उसी हालत में किया जाना चाहिए, जब नींद संबंधी अध्ययनों से यह निश्चित हो जाए कि रोगी केवल खर्राटे भरता है और नींद में बहुत कम श्वासरोध होता है या वह श्वासरोध रोग से पीड़ित नहीं है।
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