- डॉ. योगेश शाह
मधुमेह से मरीज के शरीर में कई तरह की समस्याएँ हो सकती हैं। इस खतरनाक बीमारी का सबसे पहला हमला आँखों, गुर्दों और नसों और हृदय पर पड़ता है। शुरु में मरीजों को इसके हमले का पता नहीं चलता लेकिन जब इन महत्वपूर्ण अंगों पर असर होने लगता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। मधुमेह के कारण इन अंगों की जो क्षति हो चुकी है उसकी भरपाई दुनिया की कोई दवा नहीं कर सकती लेकिन जितना बच सका है उसे संभाल लेने में ही मरीज की भलाई है।
मधुमेह अच्छे भले आदमी के जीवन को नर्क बना सकती है। ज्यादातर मरीजों को डायबिटीज की वजह से कोई लक्षण पैदा नहीं होते, अतः वे सोचते हैं कि मुझे कोई तकलीफ नहीं है तो मैं कोई दवाई क्यों लूँ? मधुमेह एक चुपचाप हत्यारा है और धीरे-धीरे यह आँखें, गुर्दे, नसें, हृदय तथा मस्तिष्क को नुकसान पहुँचाता रहता है और मरीज को पता भी नहीं चलता। यह नुकसान किसी मरीज को 5 वर्ष में तो किसी को 10-15 या बीस वर्ष के बाद सामने आ सकता है, अतः मरीज को सतर्कता बरतनी चाहिए।
हमारे यहाँ प्रायः देखा गया है कि यदि किसी को डायबिटीज नया-नया घोषित हुआ है तो आस-पास के कई लोग जिन्हें इस बीमारी का कुछ भी ज्ञान नहीं होता, वे भी सलाह देने लगते हैं। इससे कई बार मरीज सही इलाज न करवाकर नीम-हकीम, तंत्र-मंत्र तथा दूसरे अवैज्ञानिक इलाज की तरफ मुड़ जाता है। इससे अपने गुर्दे, आँख, हृदय अथवा मस्तिष्क का नुकसान कर बैठता है। यहाँ यह समझना जरूरी है कि जो नुकसान हो चुका है वह अपूरणीय क्षति है। यह समझना जरूरी है कि जो नुकसान हो चुका है उसकी भरपाई किसी दवा से नहीं हो सकती है। आगे और समस्याएँ न हों इसके लिए कुछ और ज्यादा दवाइयाँ लेनी पड़ती हैं यानी पहले से अधिक दवाइयाँ, अधिक खर्च और जोखिम भरी जिंदगी।
यदि आप मधुमेह का ठीक से इलाज नहीं करवाते हैं तो उसके दुष्परिणाम आप भी भुगतते हैं और साथ में आपका परिवार भी। क्यूँ इलाज | | मधुमेह से मरीज के शरीर में कई तरह की समस्याएँ हो सकती हैं। इस खतरनाक बीमारी का सबसे पहला हमला आँखों, गुर्दों और नसों और हृदय पर पड़ता है |
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करवाऊँ? उनको यह भी लगता है कि शायद दवाई से नुकसान हो सकता है। कुछ लोगों की धारणा है कि मधुमेह की दवाई लेने से किडनी खराब हो जाती है। इसमें अर्ध सत्य है अर्थात यदि डायबिटीज कंट्रोल में न हुई तो गुर्दे में खराबी आ सकती है। इस दौरान यदि कुछ दवाइयाँ दी जाएँ तो वह गुर्दे का बहुत ज्यादा नुकसान कर सकती है। यदि गुर्दे ठीक काम कर रहे हों तो मधुमेह की शुरुआत यानी टाइप-2 श्रेणी की बीमारी में दवाई देने में कोई हर्जा नहीं होता। कुछ लोग दूसरों से तुलना करते हैं कि मेरा परिचित या दोस्त तो सब कुछ खाता है और दवाई भी बहुत कम लेता है और उसे कुछ नुकसान नहीं हुआ। वे दरअसल गलत सोच रहे हैं।
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