- डॉ. संजय अवाशिया
बुखार आपके शरीर की रोग प्रतिरोध क्षमता (लड़ने की क्षमता) और संक्रमण की तीव्रता का आनुपातिक संघर्ष है, जो ज्वर के रूप में सामने आता है। लाक्षणिक व सही जाँच के द्वारा रोग के सही निदान में बड़ी सहायता मिलती है और चिकित्सक आपको सटीक दवाई दे सकते हैं।
ज्वर या बुखार से हम सभी भली-भाँति परिचित हैं और कभी न कभी इससे पीड़ित भी हुए हैं। बुखार शरीर में हुए जीवाणु वा वाइरस से हुए संक्रमण का सबसे आम लक्षण है। साधारण संक्रमण सामान्यतः 2-3 दिनों में स्वतः या कुछ सामान्य औषधियों से आपको स्वस्थ भी कर देते हैं। अगर किसी रोगी को बार-बार हल्का या तेज बुखार आता है तो चिकित्सक को बीमारी का सही निदान करने के लिए कुछ जाँचें कराना ही पड़ती हैं। बुखार के सबसे अधिक होने वाले कारण हैं- मलेरिया, टायफाइड, गले का संक्रमण, मूत्र नली का संक्रमण, डेंगू या वायरल फीवर आदि। असल में बुखार आपके शरीर की रोग प्रतिरोध क्षमता (लड़ने की क्षमता) और संक्रमण की तीव्रता का आनुपातिक संघर्ष है, जो ज्वर के रूप में सामने आता है। लाक्षणिक व सही जाँच के द्वारा रोग के सही निदान में बड़ी सहायता मिलती है और चिकित्सक आपको सटीक दवाई दे सकते हैं।
मलेरिया : आमतौर पर ठंड लगकर आने वाले बुखार को मलेरिया समझ लिया जाता है किंतु चिकित्सक रक्त की जाँच कराकर ही डायग्नोसिस व उपचार प्रारंभ करते हैं। मलेरिया के लिए रक्त की जाँच में रोग उत्पन्न करने वाले प्रोटोजोन (मलेरिया पेरासाइट) की उपस्थिति ब्लड स्लाइड के द्वारा सुनिश्चित की जाती है। इसके अतिरिक्त अन्य एंटीजन एंटीबॉडी टेस्ट भी कराए जाते हैं।
वायरल फीवर : इसमें भी ठंड लगकर बुखार आने के साथ पूरे शरीर में तीव्र दर्द रहता है। इस रोग का कारण एक वायरस है, जो टाइगर मच्छर के दिन में काटने से फैलता है। रक्त में उपस्थित प्लेटलेट्स की संख्या में कमी से वायरल फीवर का निदान (डायग्नोसिस) किया जाता है। वाइरस को रक्त में पहचानने के लिए महँगी एंटीजन-एंटीबॉडी टेस्ट भी कराए जाते हैं।
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