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फेफड़े को बचाएँ
- डॉ. एम.के. शास्त्री

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भारत सरकार एवं प्रदेश सरकारों ने धूम्रपान या तंबाकू गुटखे को एक सामाजिक बुराई मानते हुए इसको रोकने के लिए विभिन्न प्रयास किए हैं। परंतु जनमानस में आज भी उतनी जागरूकता नहीं आई है और तंबाकूयुक्त गुटखों का, सिगरेट का, बीड़ी का उपयोग कम नहीं हुआ है। यह एक दुःखद बात है।

वास्तव में धूम्रपान व तंबाकू के किसी भी रूप में सेवन से तंबाकू में मौजूद घातक रसायन कई रोगों के जनक हैं। नशीली दवाओं से भी घातक असर करने वाले तंबाकू के प्रति जनमानस में यह बात घर कर गई है कि धूम्रपान साधारण प्रक्रिया है। परंतु तंबाकू में पाया जाने वाला रसायन निकोटिन नशे की आदत डालने वाला तत्व है।

शुरुआती धूम्रपान करने के कुछ समय बाद आदमी का शरीर निकोटिन की माँग करने लगता है। यही माँग या तलब बाद में अनिवार्य आदत/नियमित आवश्यकता बन जाती है और यहीं से शुरू होता है हमारे शरीर, हमारी जेब व हमारे पर्यावरण पर डाका। हमारा शरीर भी विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त होने लगता है और जेब भी हल्की होने लगती है।

युवा वर्ग में धूम्रपान एक फैशन बन गया है। किशोर उम्र के बालक अपनी शान दिखाने के लिए व बालिकाएँ आधुनिक बनने के चक्कर में धूम्रपान करती हैं। वे अपने को समाज में व तथाकथित सर्कल में बड़ा दिखाने, मॉडर्न बनने के चक्कर में धूम्रपान की शुरुआत करते हैं तथा तम्बाखु का सेवन व उसके खतरों से जानते-बूझते अनजान बनने का दावा करते रहते हैं और जान-बूझकर अँधे कुएँ में छलाँग लगाते हैं और खुद को और परिवार को दुःखों में डालते हैं।
शुरुआती धूम्रपान करने के कुछ समय बाद आदमी का शरीर निकोटिन की माँग करने लगता है। यही माँग या तलब बाद में अनिवार्य आदत/नियमित आवश्यकता बन जाती है और यहीं से शुरू होता है हमारे शरीर, हमारी जेब व हमारे पर्यावरण पर डाका।


अब हम बात करें धूम्रपान, गुटखा, पान, तंबाकू खाने की आदत हमारी आर्थिक स्थिति व परिवार के बजट पर किस प्रकार असर करती है। तुलनात्मक विवरण में 1 पैकेट साधारण सिगरेट रोज, 5 गुटखे रोज, 5 पान रोज का सेवन प्रतिदिन करने से 1 माह का कुल खर्च, 1 वर्ष का खर्च व 10 वर्ष का जो होता है।

नीचे दी गई तालिका से सहज ही पता किया जा सकता है जो कि 10 वर्ष में लाखों रुपए का आँकड़ा पार कर जाता है। इन्हीं रुपए से हम घर में दूध, फल व अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ ला सकते हैं। कोई कहे कि वह घर में सब चीजें लाता है। अमीर है तो हम निवेदन करते हैं कि उपरोक्त पैसों से वह किसी गरीब विद्यार्थी की मदद करसकता है किताबें, कपड़े देकर उसे पढ़ाने में सहायक हो सकता है। चार्ट की ओर दृष्टि करते ही खर्च का आकलन किया जा सकता है।
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