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जान बच सकती है एमआरआई जाँच से
कमर और रीढ़ की हड्डी की समस्य

एमआरआई पीठ दर्द, कमर के दर्द, पैरों की असहनीय पीड़ा, लकवे और रीढ़ की हड्डी की अन्य समस्याओं की जाँच के लिए मुफीद है। समूची रीढ़ की हड्डी से जुड़ी हर समस्या और उसमें होने वाले संक्रमण को प्राथमिक स्तर पर ही पकड़ा जा सकता है।

जोड़ों की समस्य

जोड़ों की समस्या की पहचान के लिए एमआरआई बेहतर काम करती है। इससे जोड़ों की हड्डियों की तस्वीरें, कार्टिलेज, जोड़ों के ऊतक, लिगामेंट, और मांसपेशियों में आई किसी भी खराबी की स्पष्ट तस्वीरें ली जा सकती हैं। गठिया की समस्या, खेल के दौरान लगी चोट,दुर्घटना में अंगभंग होना या उनमें संक्रमण होने का आसानी से पता चल सकता है।

समूचे शरीर की समस्य

सीटी स्कैनिंग और सोनोग्राफी से सीने और पेडू क्षेत्र की सामान्य समस्याओं की तस्वीरें ली जाती हैं लेकिन जटिल समस्या की स्थिति में केवल एमआरआई पर ही निर्भर रहना पड़ता है। कई बार बीमारी के लक्षण विद्यमान रहते हैं लेकिन हर तरह के दूसरे टेस्ट नेगेटिव आते हैं। ऐसी स्थिति में एमआरआई से किए गए परीक्षणों की तस्वीरें बीमारी का सही पता बता देती हैं। शरीर में किसी भी स्थान पर गठान का सही सही स्थान पता लगाना हो तो एमआरआई से बेहतर कुछ नहीं है। सर्जन को गठान की सही स्थिति पता हो तो सर्जरी आसानी से हो जाती है।शरीर में कहीं गोली धँसी हो तो उसकी ठीक स्थिति मालूम होने पर सर्जन बिना अधिक चीर-फाड़ किए निकाल लेता है। इसके अलावा एमआरआई से शरीर की किसी भी नस का बिना कैथेटर डाले मुआयना किया जा सकता है। इसी तरह मस्तिष्क की गठान की रासायनिक स्थिति की जानकारी बिना सर्जरी किए पता लगाई जा सकती है। ऐसा दिल की बीमारियों की सही स्थिति जानने के लिए भी किया जा सकता है।

कैसे करते हैं एमआरआई से जाँ

मरीज को एक टेबल पर लिटा दिया जाता है जो गोलाकार चुंबक में सरका दी जाती है। यह चुंबक दोनों सिरों पर खुला होता है। किसी भी जाँच में 15 से 30 मिनट तक लग सकते हैं। मरीज को इस दौरान स्थिर रहना चाहिए अन्यथा तस्वीरें बिगड़ जाती हैं।

सावधानिया

आमतौर पर एमआरआई परीक्षण का शरीर पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ता, जैसा एक्सरे आदि में होता है। मरीज को इतनी सावधानी जरूर रखना चाहिए कि शरीर पर कोई धातु की वस्तु न हो। शरीर में कोई धातु का इम्पलांट (जोड़) न लगा हो। इसके साथ ही कोई पेसमेकर भी न लगा हो। गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के तीसरे चरण में अपने चिकित्सक से गंभीर परामर्श के बाद ही एमआरआई करना चाहिए।
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