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जान बच सकती है एमआरआई जाँच से
- डॉ. संगीत चौधर

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अत्याधुनिक जाँचों से बीमारियों की जड़ तक पहुँचा जा सकता है। एमआरआई की जाँच में दूसरे परीक्षणों के मुकाबले अधिक खर्च करना पड़ता है लेकिन इससे उस समस्या को पहचाना जा सकता है जो सामान्य तौर पर डॉक्टर के पकड़ में नहीं आती। आमतौर पर लोग एमआरआई को इलाज समझ बैठते हैं लेकिन यह सच नहीं है। यह रोग परीक्षण की अत्याधुनिक तकनीक है।

मेग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) सबसे आधुनिक और शरीर के अंदरूनी अंगों की तस्वीर लेने वाली शायद सबसे अनोखी टेक्नोलॉजी है। इससे डॉक्टरों को बिना चीर-फाड़ किए शरीर के अंदर हुई गड़बड़ियों को पकड़ने का मौका मिल जाता है। जो पहले किसी और पद्धति से संभव नहीं था। एमआरआई टेक्नोलॉजी में ताकतवर चुंबकीय और रेडियो तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है ताकि शरीर में प्राकृतिक रूप से मौजूद चुंबकीय तत्वों के सामंजस्य से अंदरूनी अंगों की तस्वीर ली जा सके। इस तकनीक से ली गई तस्वीरें अब तक इस्तेमाल की जा रही अन्य पद्धतियों से कहीं बेहतर नतीजे देती है।

एक्सरे और सोनोग्राफी या सीटी स्कैनिंग की तुलना में एमआरआई से शरीर के अंदरूनी अंगों के साथ ऊतकों की भी ऐसी तस्वीरें ली जा
एमआरआई से पूरे शरीर यानी सिर से लेकर पाँव तक की जाँच की जा सकती है। यही नहीं त्वचा के ऊपरी हिस्से से लेकर शरीर की गहराई में छिपे अंगों तक इस मशीन की पहुँच है
सकती हैं जो बीमारियों को और अधिक स्पष्ट तौर पर सामने लाती हैं। आमतौर पर डॉक्टर्स एमआरआई जाँच तब कराने के लिए कहतेहैं जब उन्हें किसी बीमारी का संदेह होता है और किसी और पद्धति से कराई गई जाँचें नेगेटिव आती हैं।


एमआरआई से पूरे शरीर यानी सिर से लेकर पाँव तक की जाँच की जा सकती है। यही नहीं त्वचा के ऊपरी हिस्से से लेकर शरीर की गहराई में छिपे अंगों तक इस मशीन की पहुँच है। इस पद्धति से तस्वीर लेने में हड्डियों, भारी मांसपेशियों और पेट में भरी गैसेस का असर नहीं होता जबकि दूसरी किसी अन्य टेक्नोलॉजी से ली गई तस्वीरें इन समस्याओं के कारण खराब आती हैं। एमआरआई से शरीर के किसी भी हिस्से के, किसी भी स्तर की त्रिआयामी तस्वीरें ली जा सकती हैं।

मस्तिष्क और सिर की जाँ

मस्तिष्क के विभिन्न स्तरों की तस्वीरें लेने के लिए ही यह टेक्नोलॉजी विकसित की गई है। दिमाग के नाजुक और जटिल हिस्सों की तस्वीर लेना इसलिए जरूरी है ताकि किसी भी बीमारी को उसकी प्राथमिक अवस्था में ही पकड़ी जा सके। ट्यूमर, लकवे, मिरगी, संक्रमण या शारीरिक विकास में हो रहा विलंब अथवा दिमागी विकलांगता के मरीजों के लिए एमआरआई एक वरदान के रूप में सामने आई है। अल्जाइमर और मल्टीपल स्क्लेरियोसिस जैसी बीमारियों में यह मशीन बेहतर नतीजे देती है।
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