इस वर्ष प्रतिदिन पाए जाने वाले छोटे कणों का आकार भी 2.5 पीएम है और इसका स्तर अक्टूबर के अंत तक ही 240 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर के स्तर पर पहुँच चुका है। अमेरिका का एक अध्ययन बताता है कि 2.5 पीएम के केवल 10 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर की बढ़ोतरी ही सेहत के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकती है। इसकी बढ़ती मात्रा में ज्यादा दिनों तक रहने से अस्थमा, फेफड़े की समस्या, ब्रॉन्काइटिस और हृदय संबंधी बीमारियाँ हो सकती हैं। लंबे समय तक इसी परिस्थिति में रहने से फेफड़े का कैंसर भी हो सकता है। शहर में नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा खतरनाक तरीके से बढ़ रही है।
पुरानी पीढ़ी के असफल प्रयास :
पिछले पाँच सालों में दिल्ली शहर ने प्रदूषण को कम करने के लिए हर संभव प्रयास किए। गाडि़यों की संख्या पर नियंत्रण, बसों को सीएनजी | अमेरिका का एक अध्ययन बताता है कि 2.5 पीएम के केवल 10 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर की बढ़ोतरी ही सेहत के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकती है। इसकी बढ़ती मात्रा में ज्यादा दिनों तक रहने से अस्थमा, फेफड़े की समस्या, ब्रॉन्काइटिस और हृदय संबंधी बीम |
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में तब्दील किया जाना, व्यावसायिक गाडि़यों के लिए जारी किए गए नए निर्देश इत्यादि इस दिशा में उठाए गए कुछ कदम थे। बावजूद इसके निजी गाडि़यों का बढ़ना और प्रदूषण्ा का स्तर अपनी रफ्तार पर है।
दिल्ली में चालीस लाख से भी ज्यादा गाडि़याँ हैं। अभी हाल के आँकडों के मुताबिक इस शहर में प्रतिदिन 963 नई निजी गाडि़याँ सड़कों पर उतर रही हैं। यह संख्या सीएनजी के पहले के दिनों से लगभग दुगुनी है।
डीजल के प्रति दीवानगी
सोसायटी फॉर ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चर्स के अनुसार पिछले 18 महीनों के दौरान डीजल कारों का शेयर बाजार 30 प्रतिशत बढ़ा है। डब्ल्यूएचओ और दूसरी अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का कहना है कि डीजल के कणों में भारी मात्रा में कार्सिनोजेंस पाया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत घातक है।
भविष्य है हमारे हाथों में :
वर्तमान स्थिति को देखते हुए हम प्रतिवर्ष प्रदूषण और घुटन के रसातल में एक कदम और बढ़ा रहे हैं। हर वर्ष अस्थमा और साँस की बीमारियों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हो रही है और अगर इस पर काबू नहीं पाया गया तो यह संख्या आने वाले वर्षों में और भी भयावह हो चुकी होगी। अगर दिल्लीवासी प्रदूषण और बीमारियों से बचाव चाहते हैं तो उन्हें बिना वक्त गँवाए शीघ्र ही इस दिशा में कुछ ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि हम एक स्वस्थ्ा, सुंदर और प्रदूषण मुक्त दिल्ली का निर्माण कर सकें।
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