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जल्दी असर करता है इन्हेलर
दवा लेने का तरीका-

- बिलकुल नहीं। अन्य उपचार की तुलना में ये सस्ती व अच्छी दवाइयाँ हैं।

- इन्हेलर लेने का तरीका क्या है, क्या ध्यान रखना चाहिए?

* एरोसोल रूट या इन्हेलेशन थैरेपी लेने की मशीनें कई तरह की होती हैं। आपके चिकित्सक आपकी उम्र व सुविधा के अनुसार आपके लिए सर्वश्रेष्ठ तरीका बताएँगे। जैसे-

* एमडीआई- मीटर्ड डोज इन्हेलर : इसमें हर बार पंप को दबाने से एक नपा हुआ डोज निकलता है।

* नेबुलाइजर : यह मशीन 2 से 6 हजार रु. तक की आती है व इसमें हर बार एक निश्चित दवाई का डोज भरना पड़ता है जिसे मशीन में लगी मोटर धुएँ का रूप देती है।

* डीपीआई : ड्राई पावडर इन्हेलर- इसमें दवाई एक केप्सूल या कार्ट्रिज में भरी रहती है, जिसे एक छोटी-सी मशीन के जरिए छोड़ा जाकर साँस के माध्यम से मरीज को खींचना पड़ता है।

* स्पेसर : या गुब्बारा- इसे इन्हेलर के साथ जोड़ देने से इसका असर बेहतर हो जाता है (महिलाओं, बुजुर्गों व बच्चों हेतु उपयोगी है)।

* इन्हेलर लेने की विधि : यदि इन्हेलर को सही तरीके से नहीं लिया जाता है तो आप उससे पूरा फायदा नहीं उठा पाते हैं व दवाई का डोज भी ज्यादा लगता है।

* पंप को मुँह के सामने रखकर या होंठों में दबाकर रखें।

* जब साँस अंदर लेना प्रारंभ करें तब पंप को दबाए रखें।

* जब पूरी साँस ले लें तब कुछ क्षण तक (जब तक संभव हो) साँस को रोके रखें। इससे दवाइयों को कार्य करने का वक्त मिलता है।

* फिर धीरे से साँस छोड़ें।

* पुनः दो-तीन बार गहरी-गहरी साँस लें।

* यदि उसी दवाई या अन्य दवाई के इन्हेलर लेना हो तो 3 से 5 मिनट के बाद इसी प्रक्रिया से लें।
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