|
कई रोगों की जड़ है कब्जियत
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
-डॉ. बी.के. बांद्रे
भारत वर्ष के अतिरिक्त अन्य देशों में रहने वाले लोगों में कोष्ठबद्धता या कब्जियत का रोग सामान्यतः नब्बे प्रतिशत पाया जाता है। अधिकांश लोग इस रोग की पहचान नहीं कर पाते हैं। विशेषतः 6 से 16 वर्ष की आयु के किशोर-किशोरियों में इस रोग की पहचान करना असंभव हो जाता है। अधेड़ उम्र के लोग इसे पहचानने में भूल करते हैं।
कब्जियत के लक्षण
जैसा कि उपरोक्त उदाहरण दिया वैसे ही भूल न हो इसके लिए इस कष्टसाध्य रोग के लक्षण व्यक्ति को ज्ञात होना अति आवश्यक है। कब्जियत से धीरे-धीरे पेट एवं संपूर्ण शरीर मोटा (स्थूल) होने लगता है। अनावश्यक भूख बढ़ना या कम होना दोनों संभावनाएँ बनी रहती हैं। बच्चों में मोटापा और भूख न लगना इसका प्रमुख कारण है। छाती में जलन होना विशेषतः रात्रि देर से भोजन करने के बाद या शाम को भोजन के बाद छाती में जलन, डकारें आना, मुँह से बदबू आना, खट्टा पानी मुँह में आना, चेहरे पर मुँहासे, गुदाद्वार से गैस निकलना, पेट का फूलना, सिर, गर्दन, कमर में दर्द रहना, पेशाब में जलन होना कब्जियत के प्रारंभिक लक्षण हैं।
दीर्घकाल इस रोग का उपचार न करने पर मधुमेह, हर्निया, एपेंडीसायटिस, अल्सर, मोतियाबिन्द, हृदय रोग, एसीडिटी, उच्च व निम्न रक्तचाप, नींद की कमी, दिनभर डकारें आना, शरीर एवं मुँह पर मुँहासे जैसी बड़ी-बड़ी फुँसियाँ, उभरना, चेहरे पर कालापन विशेषतः आँखों के नीचे, शरीर पीला पड़ना, कमजोरी, यौनशक्ति का ह्रास होना, श्वास फूलना, थकान, कफवृद्धि, जुकाम बार-बार होना, लाल रक्तकणों की कमी होना, रक्त में कोलेस्ट्राल बढ़ जाना, जोड़ों के दर्द और गठिया, जोड़ों का लाल होना और सूजन के साथ दर्द होना एवं सामान्य कार्य की क्षमता कम होना इस रोग के प्रमुख जीर्ण लक्षण हैं। बच्चों में टॉन्सिल में सूजन, मवाद, बुखार एवं ऊँचाई न बढ़ना इसके प्रमुख लक्षण हैं। किशोरावस्था में चेहरे पर मुँहासे होकर फटना और काले दाग बने रहना, सिरदर्द की शिकायत बढ़ती उम्र के बच्चों में पाई जाती है।
कब्जियत होने के कारण
भोजन निश्चित समय पर न करना, भूख लगने पर भोजन की जगह नाश्ता (फास्टफूड) करना और भोजन को जल्दी-जल्दी करना, उसे टालते | भोजन, दोपहर में हो या रात्रि का हो, करते ही सोना कब्जियत एवं एसीडिटी का प्रमुख कारण शहरी लोगों में अधिक दिखाई पड़ता है। शहर के लोग देर रात भोजन करते हैं और सो जाते हैं। सोने में एक ही करवट का उपयोग पूर्ण रात्रि करने से भी कब्जियत हो जाती है |
| |
रहना। रात्रि को देर से भोजन करना और जल्दी सो जाना और भोजन चबा-चबाकर नहीं खाना, भोजन के समय जोर-जोर से बातचीत करना, भोजन करते समय ध्यान टी.वी. या अन्य कार्य में लगाना, खड़े-खड़े और जल्दी-जल्दी भोजन करना और तुरंत 2-4 गिलास पानी पीना कब्जियत होने के प्रमुख कारण सभी लोगों में पाए जाते हैं। मिर्च-मसालों का प्रयोग अधिक करना, तले हुए और दीर्घकाल तक सुरक्षित रखे जाने वाले पदार्थों का सेवन अधिक करना। जैसे पूड़ी, बेसन की सेंव, पकोड़े, मुंगोड़े, आलू की टिकिया, पानी पताशे, ब्रेड एवं उससे निर्मित पदार्थ, बिस्किट्स, टोस्ट, पेस्ट्री, केक, अंडों की आमलेट आदि। इन पदार्थों में रेशे कम होने से मल पेट से सहज रूप से बाहर न आना कब्जियत है। आधे से एक घंटे तक शौचालय में बैठकर जोर लगाकर मल निकालने का प्रयत्न बवासीर, हर्निया आदि अन्य रोगों को जन्म देता है।
भोजन, दोपहर में हो या रात्रि का हो, करते ही सोना कब्जियत एवं एसीडिटी का प्रमुख कारण शहरी लोगों में अधिक दिखाई पड़ता है। शहर के लोग देर रात भोजन करते हैं और सो जाते हैं। सोने में एक ही करवट का उपयोग पूर्ण रात्रि करने से भी कब्जियत हो जाती है। पानी की कमी भी इस रोग को बढ़ावा देती है। भोजन के आधे घंटे पूर्व एवं एक घंटे बाद तक पानी का उपयोग कम से कम करें, इसके अतिरिक्त समय में लगभग 3 से 5 लीटर अर्थात् 12 से 15 गिलास (200 मिलीलीटर प्रति गिलास) पानी पीना चाहिए। भोजन में मौसम के फल, पत्तेदार हरी सब्जियाँ, अंकुरित अनाज, मोटे आटे की रोटी का समावेश कब्जियत के कारणों को कम करने में सहयोगी है। लगातार एक जगह बैठकर कार्य करना, प्रातः या सायंकाल में भ्रमण या पैदल न चलना भी कब्जियत का कारण बनाता है। व्यायाम की कमी भी कब्जियत का कारण बनता है। भोजन में अधिक मात्रा में प्रोटीन या अधिक कार्बोज लेने से भी कब्जियत होती है। डिब्बों में बंद भोजन का नियमति उपयोग न करें। योग के अनुसार भूख का आधा भाग भोजन से प्राप्त करें एक चौथाई पानी से और एक चौथाई हवा के लिए रिक्त रखें उसे संतुलित आहार कहा जाता है।
योग क्रियाओं से कब्जियत का निवारण
(1) अग्निसार क्रिया (2) हस्तपादासन (3) वज्रासन (4) शशकासन (5) वक्रासन (6) धनुरासन (7) उत्तानपादासन (8) उत्तानपादांगुष्ठासन (9) पवनमुक्तासन, (10) शवासन।
|
|
|
|
|