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दमे का निकालें दम!
बचाव के उपाय एवं उपचा

स्वस्थ व्यक्ति इस रोग से बचने के लिए अपने आसपास की सफाई की ओर ध्यान दे। अपने रहने, खाने-पीने एवं सोने की जगह तथा वस्तुएँ
अवांछित खाद्य पदार्थों में प्रमुख हैं- बासी, ठंडा एवं तीखा अन्न, अधिक शीतल जल, बर्फयुक्त शर्बत, सरसों, राई, गर्म मसाला, उड़द की दाल, दही, मछली एवं अन्य मांस-मदिरा, चाय व उत्तेजक वस्तुएँ
स्वच्छ रखें। अत्यधिक धूल, आर्द्रता तथा नमीयुक्त वातावरण से दूर रहें। सर्दी, खाँसी जुकाम और अन्य एलर्जी तथा संक्रामक रोगों की अवस्था में लापरवाही न बरतें, तुरंत उचित इलाज करवाएँ। अपनी दिनचर्या में व्यायाम तथा उचित आहार को शामिल करें। मादक पदार्थों का सेवन न करें। चिंता, तनाव और उदासी की स्थिति लंबे समय तक न रहने दें। इन सब सावधानियों के बावजूद अगर रोग के चंगुल में फँस जाएँ तो विधिवत जाँच करवाकर उपचार प्रारंभ करें। निम्न विधियों को नियमित उपयोग में लाने पर शीघ्र लाभ मिलेगा-


प्राकृतिक जीवनशैली अपनाएँ। इसमें प्रमुख है प्रातः जल्दी जागें। कब्ज की स्थिति अधिक दिनों तक न रहने दें। भोजन नियमित एवं निश्चित समय पर ही करें।

सायंकाल भोजन शीघ्र कर लें। भोजन हल्का हो। दो समय के भोजन के बीच अधिक कुछ न खाएँ। भोजन के पूर्व एवं भोजन के तुरंत पश्चात कोई भी भारी कार्य या व्यायाम न करें तथा अधिक मात्रा में पानी न पिएँ। रोग की अवस्था में आहार में शहद, नींबू, लहसुन, पत्ता गोभी, गाजर, ककड़ी आदि का सलाद, गेहूँ के चोकर की रोटी, पालक, तुरई, परवल, लौकी, सहजने की फली, बथुआ की भाजी तथा मूँग, अरहर की दाल को अवश्य शामिल करें।

अवांछित खाद्य पदार्थों में प्रमुख हैं- बासी, ठंडा एवं तीखा अन्न, अधिक शीतल जल, बर्फयुक्त शर्बत, सरसों, राई, गर्म मसाला, उड़द की दाल, दही, मछली एवं अन्य मांस-मदिरा, चाय व उत्तेजक वस्तुएँ। चीनी एवं नमक का अधिक प्रयोग, टिन में बंद खाद्य पदार्थ, अत्यधिक वसा एवं प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ, कफवर्धक खाद्य एवं पेय पदार्थ दमे को प्रोत्साहित करते हैं, अतः इनका प्रयोग न करें और अगर करना ही पड़े तो अल्प मात्रा में करें

* दमे के दौरे में तात्कालिक लाभ के लिए पैरों को गर्म पानी में रखें तथा गर्म पानी को घुटनों से एड़ी तक डालते रहें।

* दौरे के समय गुनगुना पानी पीते रहें। गुनगुना पानी हमेशा ही उपयोग करना लाभदायक है।

* दौरे के समय कमरे की खिड़की-दरवाजे खोल दें तथा रोगी को शांत स्थिति में रखें। रोगी की सुविधानुसार उसे लिटा दें या बैठा दें। छाती एवं पीठ पर हल्की मालिश करें।
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