मुख्य पृष्ठ > विविध > सेहत > जान है, जहान है
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
हैपेटाइटिस-'बी'
NDND
-डॉ. अनिल भदौरिय

हैपेटाइटिस- 'बी' एक सूक्ष्म वायरस (विषाणु) से होने वाला लीवर का संक्रमण है। लीवर शरीर में पाई जाने वाली सबसे बड़ी ग्रंथि है, जो सभी प्रकार के रोगाणुओं से समान रूप से प्रभावित होती है। परंतु वायरस से होने वाले विभिन्न प्रकार के संक्रमण जानलेवा भी हो सकते हैं। लीवर का संक्रमण करने वाले विभिन्न वायरस को हैपेटाइटिस 'ए', 'ी', 'ी', 'ी', 'ई' समूहों से विभाजित किया गया है।

इस वायरस के लीवर तक पहुँचने का आसानतम मार्ग मुँह या मलद्वार है। वैसे तो 'ए' से 'ई' तक सभी वाइरस रोगी के लिए प्राणघातक हो सकते हैं, किंतु हैपेटाइटिस 'बी' वायरस (विषाणु) का संक्रमण सबसे खतरनाक और जानलेवा है।

हैपेटाइटिस 'बी' की मारक क्षमता का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि इससे होने वाली दैनिक मौतों की संख्या, भारत में साल भर में एड्स से होने वाली मौतों के बराबर है। एड्स वायरस की भाँति ही हैपेटाइटिस 'बी' वायरस का संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में अनेक तरीकों से होता है। हैपेटाइटिस 'बी' से संक्रमित होने का सबसे बड़ा जोखिम चिकित्सक तथा पैरामेडिकल स्टाफ को रहता है। यह वायरस 45 दिन से 6 माह के भीतर शरीर में अपना पूर्ण विकास कर लेता है और बीमारी के लाक्षणिक गुणों के साथ प्रस्तुत होता है।

ऐसे भी होता है संक्रम

* सुई द्वारा टीकाकरण।

* मांसपेशी में लगाया जाने वाला औषधि इंजेक्शन।

* पैथोलॉजी प्रयोगशाला में रक्त सेम्पल का लेना।

* त्वचा पर सुई द्वारा फैशनेबल टैटू बनवाना।

* एक्यूपंक्चर।

* रक्त उत्पादों का असुरक्षित रख-रखाव।

उभयलिंगी या नर-समलिंगी संबंधों में लार, मासिक स्राव, योनि स्राव, वीर्य, मातृ-दुग्ध, मूत्र, मल या रक्त आदि से संपर्क इस वायरस को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में पहुँचाने में सहायक हैं। यह विषाणु इतना खतरनाक है कि लीवर की कोशिकाओं का सामान्य व्यवहार भी बदल देता है, जो बाद में लीवर के कैंसर में तब्दील हो सकता है।
1 | 2  >>  
और भी
जब पड़े बच्‍चों को अस्थमा का दौरा
व्‍यसन से बिगाड़ती है जिंदगी
कमर दर्द भगाएँ यौगिक क्रियाओं से
अब ब्रेन के लिए भी जिम
हाइपोग्लाइसिमिया क्या है?
ड्राय आइज की परेशानी से बचें