पढ़ने में तो यह भी आया है कि केवल 4 जीनों की हेरा-फेरी करके चूहे की त्वचीय कोशिकाओं को भ्रूणीय स्टेम सेल में तब्दील किया जा चुका है। 16 जनवरी 2008 के एक ताज़ा अनुसंधान के मुताबिक कैलिफ़ोर्निया की एक कंपनी ने साधारण त्वचा कोशिका से मानव भ्रूण बनाने का दावा किया है। है ना कमाल की खोज! यहाँ आपको यह याद दिला दें कि डॉली नामक भेड़ भी स्टेम सेल की ही देन थी। स्टेम सेल बैंकिंग को एक युगांतकारी तकनीक माना जा रहा है। इन कोशिकाओं ने बहुतों का जीवन बचाया है। ज़रा सोचिए कि आपके बच्चे के पास अपने आनुवांशिक स्रोत से 100 प्रतिशत मेल खाता कोई स्रोत होगा और उसका शरीर किसी भी परिस्थिति में उसे बहुत आसानी से अपना लेगा। इस अद्वितीय जैविक स्रोत को संग्रहीत करने और सहेज कर रखने का मौका आपको जीवन में केवल एक ही बार मिलेगा।
यह सिर्फ़ बच्चे के लिए नहीं बल्कि पूरे परिवार के लिए निवेश है क्योंकि एक ही परिवार के सदस्यों (ख़ासकर सहोदर भाई-बहनों) में ट्रांसप्लांटेशन की विफलता की संभावना कम होती है। एक बार इन कोशिकाओं को बैंक में रखकर आप हमेशा के लिए निश्चिंत हो सकते हैं। उन बच्चों के लिए तो यह आशा की एक किरण है, जिनके परिवारों में आनुवांशिक बीमारियों का इतिहास हो। तब की बात अलग थी जब इतनी तकनीकें, उपकरण और सुविधाएँ नहीं थीं। शरीर और बीमारियों को भगवान की देन मानकर, जस-का-तस स्वीकार कर लिया जाता था। पर आज का समय संतुष्टि का नहीं है, आज का समय थोड़ा और विश करने का है... अपनी ही कोशिकाओं से, अपने इच्छित गुणों का समावेश करके, अपने ही समान अंग बना लेना, यह विश विज्ञान ही पूरी कर सकता है। शरीर की कठपुतली को विज्ञान अब अपने इशारों पर नचा सकता है।
स्टेम सेल्स पर आधारित उपन्यास ‘होप : इन विट्रो’ (2007 में प्रकाशित) की तर्ज पर भारतीय मूल के एक अमेरिकी चिकित्सक ने ‘होप’ नामक फ़िल्म भी बना डाली है, जो वर्ष 2008 के कान फ़िल्मोत्सव में प्रदर्शित की जाने वाली है। स्टेम सेल बैंकिंग निश्चित ही आने वाले समय की महानतम उपलब्धियों में से एक होगी। आपको ताज्जुब होगा कि चीन के थिएनचिन शहर के एक जीन बैंक में 3 लाख बच्चों की गर्भनालें सुरक्षित हैं। हमारे यहाँ ये आँकड़े शायद कुछ हज़ार में ही हैं।
इसका सबसे बड़ा कारण है जागरूकता का अभाव और जैविक से ज़्यादा भौतिक पूँजी को महत्व देना। गाड़ी, बंगला और ऐशो-आराम में निवेश के लिए तो जीवन पड़ा है, लेकिन कोशिकाओं का निवेश जीवन में सिर्फ़ एक ही बार हो सकता है। बीमारियों और लाचारियों से भरा भूतकाल भूल जाने के लिए, अपनी आने वाली पीढ़ियों का स्वस्थ और सुनहरा भविष्य बुनने के लिए, जीवन की रक्षा का यह अकूत भंडार हमें आज ही संभाल कर रखना होगा। क्योंकि एक बार ही तो मिलनी है, जीवन की यह मधुशाला...!
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