आज से 3000 ईसा पूर्व बीमा की नींव रखते वक्त चीन के व्यापारियों ने सोचा भी नहीं होगा कि भौतिक वस्तुओं का बीमा करवाते-करवाते हम एक दिन जैविक वस्तुओं का बीमा भी करवाने लग जाएँगे, लेकिन मनुष्य बड़ा सयाना प्राणी है... ज़मीन-जायदाद, स्वास्थ्य और वाहनों के बाद उसने अब अपनी कोशिकाओं का बीमा करवाने का तरीका भी ढूँढ निकाला है, ताकि किसी दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में बैंक में रखी ख़ुद की कोशिकाओं से वह अपना और अपने परिवार का जीवन बचा सके... जी हाँ, ये चमत्कार नहीं है, ये एक लाइफ़ टाइम अपॉर्चुनिटी है, जिसे ‘स्टेम सेल बैंकिंग’ कहते हैं।
स्टेम सेल बैंकिंग के बारे में जानने से पहले ये जान लेना ज़रूरी है कि स्टेम सेल क्या है। स्टेम सेल्स दरअसल बहुकोशिकीय जीवों में पाई जाने वाली वे कोशिकाएँ हैं, जिन्हें करने के लिए शरीर ने कोई ख़ास काम नहीं दिया है। एक स्टेम (तना) जिस तरह शाखाएँ, पत्तियाँ, प्रतान, कलियाँ, फल, फूल और बीज बना सकता है, उसी तरह स्टेम सेल्स में भी शरीर की सारी कोशिकाओं की भूमिका निभाने की क्षमता होती है।
ये कोशिकाएँ शरीर का कच्चा माल हैं, जिन्हें 300 प्रकार की कोशिकाओं में बदला जा सकता है। स्टेम सेल्स अविभेदित होती हैं, कोई काम न होने पर वर्षों तक अंगों में सुप्तावस्था में पड़ी रहती हैं और जरूरत पड़ने पर विभाजन द्वारा अनगिनत कोशिकाएँ बना सकती हैं।
जैविक सिग्नल इनके लिए उत्प्रेरणा का कार्य करते हैं, जिससे सुप्त जीन सक्रिय हो जाते हैं, कोशिका नए प्रोटीन बनाती है और विभाजन व विभेदन (शरीर के विशिष्ट अंगों की कोशिकाएँ बनना) शुरू हो जाता है। एक बार विभेदन हो जाने के पश्चात इनका विभाजन रुक जाता है। इस तरह एक निष्क्रिय कोशिका अलग-अलग तरह के सक्रिय ऊतकों में बदल जाती है। | | ज़मीन-जायदाद, स्वास्थ्य और वाहनों के बाद उसने अब अपनी कोशिकाओं का बीमा करवाने का तरीका भी ढूँढ निकाला है, ताकि किसी दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में बैंक में रखी ख़ुद की कोशिकाओं से वह अपना और अपने परिवार का जीवन बचा सके... जी हाँ, ये चमत्कार नहीं है। |
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अब ये देखते हैं कि हमारे शरीर में स्टेम सेल्स बनती कैसे हैं। आप जानते होंगे कि अंडाणु और शुक्राणु के संयोग से भ्रूण बनता है। एक कोशिका के रूप में बना यह भ्रूण तेजी-से कई कोशिकाओं (ब्लास्टोमीयर) में विभाजित हो जाता है। जब इन कोशिकाओं की संख्या 20 से 30 तक हो जाती है तो शहतूत या अंगूर के गुच्छे के आकार की एक संरचना प्राप्त होती है, जिसे मोरुला कहते हैं। यह मोरुला आगे और विभाजन करके एक गेंद के समान आकृति वाला ब्लास्टोसिस्ट (50-150 कोशिका) बनाता है। इस ब्लास्टोसिस्ट में इनर सेल मास नाम का कोशिकाओं का एक समूह होता है, जो भविष्य में भ्रूणीय स्टेम सेल्स बनाता है।
स्टेम सेल्स के मुख्य स्रोत हैं- गर्भ नाल से प्राप्त रक्त, एम्नियोटिक तरल, कृत्रिम निषेचन से प्राप्त भ्रूण, वयस्कों का मस्तिष्क, अस्थि मज्जा (बोन मैरो), किडनी, परिधीय रक्त, रक्त वाहिकाएँ, कंकाल पेशियाँ और लीवर। पहले कृत्रिम रूप से बनाए गए भ्रूण या ब्लास्टोसिस्ट की कोशिकाओं को निकालकर, उनका संवर्धन करके स्टेम सेल बनाई जाती थी तथा उनका उपयोग अनुसंधान और उपचार में किया जाता था।
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