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शरीर का बायोकेमिकल लोचा और योग
प्रयोगों से पता चलता है कि नियमित रूप से योग करने से हमारे शरीर के लिए फ़ायदेमंद कोलीनएस्टेरेज़ एंज़ाइम, उच्च घनत्व वाले कोलेस्टेरॉल (High Density Lipid Cholesterol), एस्कॉर्बिक अम्ल (विटामिन सी), कुल सीरम प्रोटीन, थायरॉक्सिन हार्मोन, लिम्फ़ोसाइट की संख्या, एटीपेज़ (ATPase) एंज़ाइम, हीमेटोक्रिट और हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है, साथ ही सोडियम, ग्लूकोज़, कुल कोलेस्टेरॉल, ट्रायग्लिसरॉइड्स, कुल श्वेत रक्त कणिकाएँ (WBC), निम्न घनत्व वाले कोलेस्टेरॉल (Low Density Lipid Cholesterol), अत्यंत निम्न घनत्व वाले कोलेस्टेरॉल (Very Low Density Lipid Cholesterol) और केटेकॉलअमीन्स का स्तर सामान्य हो जाता है।

योग से गठिया, अस्थमा, पीठ और कमर का दर्द, कार्पल टनल सिंड्रोम, वेरीकोस वेंस, अत्यधिक थकान, इपिलेप्सी, सिरदर्द, मल्टीपल स्क्लेरोसिस के इलाज में उल्लेखनीय सफलता मिली है। योग मस्तिष्क में दर्द की अनुभूति वाले केंद्र को दर्द का नियंत्रण करने में मदद करता है तथा प्राकृतिक दर्द निवारकों का स्राव करता है। थॉयराइड ग्रंथि का हार्मोनल स्राव नियंत्रित करके शरीर का भार सामान्य बनाए रखता है और वसा की खपत बढ़ाता है। गहरे श्वासोच्छवास से शरीर की कोशिकाओं, विशेषकर वसा कोशिकाओं की ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता बढ़ जाती है। इससे वसा कोशिकाओं का जारण (ऑक्सीडेशन) बढ़ जाता है और कैलोरी का विघटन होने लगता है। योग से लिपिड चयापचय (मेटाबॉलिज़्म) से संबंधित गड़बड़ियाँ भी दूर की जा सकती हैं।

कुछ योगासनों से डायबिटीज़ मेलाइटस, कोरोनरी हार्ट डिसीज़, हर्निया, वर्टिगो, डिसलिपिडिमिया, तनाव, लीवर, पेन्क्रियाज़, प्लीहा, किडनी और श्वसन तंत्र संबंधी बीमारियाँ दूर होती हैं। ब्रोंकाइटिस, कब्ज, एम्फायसेमा, सर्दी, खाँसी, अम्लीय आमाशय, फ, वात, पित्त, अपचन, मासिक के पहले होने वाली समस्याएँ, प्रोस्ट्रेट की समस्याएँ, गठिया, साइटिका, सायनस, चर्म रोग, गर्भावस्था की जटिलताएँ, गले की तकलीफें, झुर्रियाँ, सेरीब्रल पाल्सी, ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियाँ भी योग के सही और नियमित अभ्यास से दूर की जा सकती हैं

योग शरीर की बायोकेमिकल फैक्टरी कही जाने वाली हमारी कोशिकाओं को चिरयुवा बनाए रखता है, या यह कहें कि उम्र हो जाने पर भी वृद्धावस्था का एहसास नहीं होने देता। अगर विज्ञान की मानें तो किसी व्यक्ति की आयु निर्धारण का पैमाना वर्षों की संख्या नहीं, रीढ़ का लचीलापन है। योग से शरीर में लचक आती है, त्वचा में कसाव आता है, चर्बी घटती है, शारीरिक तनाव दूर होते हैं, उदर की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं, दोहरी ठुड्डी से निजात मिलती है, मांसपेशियाँ सुडौल होती हैं और शारीरिक मुद्राओं में सुधार होता है।

योग कोशिका क्षय की केटाबॉलिक प्रक्रिया तथा कोशिकाओं में ऑटो-इन्टॉक्सिकेशन या स्वत: विषाक्तता कम करता है। साथ ही कोशिकाओं में पोषक पदार्थों और ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाता है तथा विषैले पदार्थों व कोशिकीय अपशिष्टों का निष्कासन करता है। योग से बालों के फॉलिकल्स में रक्त संचार बढ़ता है, गर्दन की तंत्रिकाओं व वाहिकाओं का रक्त संचार बढ़ने से खोपड़ी में बेहतर रक्त परिवहन होता है और बाल अपने प्राकृतिक रंग में ही बने रहते हैं। योग से देखने और सुनने की क्षमता भी बढ़ती है। पीयूष, थायरॉइड, एड्रीनल और सेक्स ग्रंथियों पर योग का परोक्ष/अपरोक्ष प्रभाव होता है, जो साठ साल के बूढ़े को साठ साल का जवान बना सकता है।
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