- डॉ. राजीव चौधरी
मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद कौन-सा लेंस डालें यह प्रश्न अधिकांश मरीजों और उनके परिजनों को परेशान किए रहता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान प्रति सेंकड की दर से प्रगति कर रहा है। हर दिन कोई नई किस्म का लेंस बाजार में आ जाता है। आप अपनी जरूरत के मुताबिक अपने लेंस का चयन करें। उचित लेंस का चयन करने के लिए अपने विशेषज्ञ की सलाह भी ले सकते हैं। यदि आपका बजट साथ नहीं दे रहा हो तो सादा लेंस चुन सकते हैं। यदि आपको अपनी जरूरत के मुताबिक मल्टी फोकल लेंस चाहिए तो वैसा करें। किसी के कहने अथवा सुनी-सुनाई बातों पर ध्यान न दें। इस मामले में आपका जनरल प्रैक्टिशनर भी आपको सही सलाह दे सकता है।
मोतियाबिंद बहुतायत से पाई जाने वाली आँखों की वह बीमारी है, जिसमें आँख के लेंस की पारदर्शिता कम/खत्म हो जाती है और इसीलिए मरीज की दृष्टि प्रभावित होती है। मोतियाबिंद का एकमात्र इलाज ऑपरेशन है। पिछले एक दशक में मोतियाबिंद ऑपरेशन की तकनीक में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। पहले मोतियाबिंद के ऑपरेशन में 12-13 मिलीमीटर का चीरा लगता था और टाँके लगाना पड़ते थे, मगर आजकल 2.5-3 मिलीमीटर के चीरे में फेकोइमल्सिफिकेशन पद्धति से बगैर टाँके का ऑपरेशन हो जाता है। ऑपरेशन के दौरान विभिन्न तरह के लेंस उपयोग में लाए जाते हैं। जिस दूरी पर लेंस प्रभावी होता है, उस दृष्टि से दो तरह के लेंस होते हैं।
1. मोनो फोकल लेंस : इन लेंसों के प्रत्यारोपण के पश्चात व्यक्ति को नजदीक के लिए निश्चित रूप से चश्मे का नंबर इस्तेमाल करना पड़ता है, जबकि दूरी के लिए चश्मे की आवश्यकता नहीं के बराबर/कम पड़ती है।
2. मल्टी फोकल लेंस : इन लेंसों से व्यक्ति विभिन्न दूरियों तक स्पष्ट रूप से देख सकता है और नजदीक के कार्य के लिए भी चश्मे की | | वर्तमान में ज्यादातर मरीज मोतियाबिंद के पकने का इंतजार किए बगैर, परेशानी आते से ही ऑपरेशन कराना पसंद करते हैं |
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आवश्यकता अत्यंत कम हो जाती है।
* वर्तमान में ज्यादातर मरीज मोतियाबिंद के पकने का इंतजार किए बगैर, परेशानी आते से ही ऑपरेशन कराना पसंद करते हैं और इसीलिए मरीज की अपेक्षाएँ बदल जाती हैं। इनमें मुख्य है-
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