सकारात्मक ध्वनियाँ शरीर के तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ती हैं जबकि नकारात्मक ध्वनियाँ शरीर की ऊर्जा तक का ह्रास कर देती हैं। मंत्र और कुछ नहीं बल्कि सकारात्मक ध्वनियों का समूह है जो विभिन्न शब्दों के संयोग से पैदा होते हैं। दुनिया के सभी धर्मों में मंत्रों के महत्व को स्वीकार किया गया है। जिस तरह मुस्लिम संप्रदाय में कुरान की आयतों को मंत्रों के रूप में भी स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रयोग किया जाता है उसी तरह ईसाई समाज भी बाईबिल के सूत्र वाक्यों का प्रयोग करते हैं।
इस ब्रह्मांड में प्रत्येक पदार्थ निरंतर दोलायमान अवस्था में है। छोटे से छोटे डीएनए से लेकर बड़े से बड़े ग्रह तक सभी एक निश्चित गति से कंपायमान हैं जिससे इतनी सूक्ष्म ध्वनि निकल रही है जो मानवीय कानों को कभी सुनाई नहीं देती। बीत चुके युगों में यह ध्वनि ऋषियों और मुनियों को ध्यान अवस्था में जाने पर सुनाई देती थी। उन्होंने यह जान लिया था कि विशेष तरह की ध्वनि मस्तिष्क के विशेष हिस्से को उत्तेजित करने में सक्षम थी। इसी से अद्वितीय शक्तियाँ भी जागृत होती थीं जिन्हें सिद्धि भी कहा जाता है।
मंत्रों का हमारे शरीर और मस्तिष्क पर दो कारणों से गहरा प्रभाव पड़ता है। पहला यह कि ध्वनि की तरंगें समूचे शरीर को प्रभावित करती हैं। दूसरा यह कि लगातार हो रहे शब्दोच्चार के साथ भावनात्मक ऊर्जा का समग्र प्रभाव हम तक पहुँचता है। मंत्रों से हमारे शरीर का स्वस्थ रहने से सीधा संबंध है। मंत्रों से निकली ध्वनि शरीर के उन सेलों के संवेगों को ठीक करने में सक्षम है जो किसी कारण अपनी स्वाभाविक गति या लय खो बैठते हैं। सेलों के अपनी गति से हट जाने से ही हम बीमार होते हैं। मंत्रों की ध्वनि से हमारे स्थूल और सूक्ष्म शरीर दोनों सकारात्मक रूप से प्रभावित होते हैं। हमारे शरीर को घेरने वाला रक्षा कवच या 'औरा' पर भी इसका ऐसा ही प्रभाव पड़ता है। हम जैसे ही कोई शब्द सुनते हैं, उसके प्रति भावनात्मक रूप से प्रतिक्रिया करते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम उस शब्द से मानवीय समाज पर पड़ने वाले प्रभाव से परिचित हैं। उदाहरण के तौर पर 'माँ' शब्द से निकलने वाली ध्वनि से भावनात्मक ऊर्जा व्यवस्थित हो जाती है।
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