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मन्थन रस
सयाने लोगों ने कहा है कि बीमार पड़ने पर आयुर्वेद या मेडिकल साइंस पढ़कर खुद वैद्य या डॉक्टर बनना जरूरी नहीं, संभव भी नहीं, बल्कि वैद्य या डॉक्टर से इलाज करा लेना अक्लमंदी है। दूध के लिए गाय-भैंस पालना जरूरी नहीं, ग्वाले से दूध ले लेना अक्लमंदी है। रहने के लिए खुद मकान बनाना जरूरी नहीं, बल्कि बना बनाया मकान किराए पर लेकर रहना अक्लमंदी है। इसी प्रकार इतनी खटपट कर घर पर नुस्खा बनाना जरूरी नहीं। दुकान से खरीदकर सेवन करना अक्लमंदी है। फिर भी जो घर पर बनाने को राजी हों, समर्थ और सक्षम हों, वे घर पर बना सकें, इसी हेतु से हम नुस्खा और निर्माण विधि का विवरण प्रस्तुत करते आ रहे हैं। यदि कोई घटक द्रव्य आपके गांव, कस्बे या शहर के बाजार में न मिले तो किसी बड़े शहर से मंगा लें या खुद खरीद लाएं। हम सिर्फ राह बता सकते हैं, हमसफर नहीं बन सकते। कृपया हमारी सीमा, विवशता और अत्यन्त व्यस्तता को ध्यान में रखें।

उपयोग- जैसे कि इस योग के नाम से ही प्रकट होता है, यह योग काम शक्ति बढ़ाने वाला एक उत्तम योग है। मन्थन नाम है कामदेव का, क्योंकि काम भावना मन को मथने वाली होती है। काम भावना मन से ही उत्पन्न और संचालित होती है, इसलिए कामदेव का एक नाम 'मनोज' (मन का ओज या मन से उत्पन्न होने वाला) भी है। 'मन्थन रस' का मतलब हुआ काभ भावना और काम शक्ति देने वाला तथा बुढ़ापा, रोग और मृत्यु को दूर रखने वाला यानी दीघार्यु करने वाला योग। ऐसे अद्भुत और अतिश्रेष्ठ योग का उपयोग करने से क्या क्या लाभ होते हैं, इसकी सफल सिद्ध जानकारी प्रस्तुत है। इस योग का उपयोग करें और लाभ उठाएँ।

स्तम्भनशक्ति की कमी यानी शीघ्रपतन होने की स्थिति समाप्त करने के लिए जो आयुर्वेदिक नुस्खे कारआमद और असरकारक माने जाते हैं, उनमें प्रायः अफीम का प्रयोग होता ही है। हम वाजीकरण योग में अफीम के उपयोग को पसंद नहीं करते, क्योंकि अफीम का सेवन करने से इसकी लत पड़ जाती है, जिसे व्यसन कहते हैं इसलिए हमने कभी कोई ऐसा नुस्खा प्रस्तुत नहीं किया, जिसके घटक द्रव्यों में अफीम भी शामिल हो। बड़े सुख को पाने के लिए छोटे-मोटे दुःख उठा लेना बेहतर होता है। मन्थन रस इस दृष्टि से श्रेष्ठ और निरापद योग है, क्योंकि इसमें अफीम नहीं डाली जाती फिर भी यह स्तम्भन शक्ति बढ़ा कर शीघ्रपतन की स्थिति को खत्म करने में सक्षम है।

अफीम या अन्य कोई मादक द्रव्य से युक्त न होने की वजह से कोई भी विवाहित पुरुष इस योग का सेवन बेधड़क होकर कर सकता है। महिलाएँ भी इस योग का सेवन कर सकती हैं, क्योंकि यह योग श्वेत प्रदर रोग गर्भाशय की कमजोरी, बीजकोषों की शिथिलता आदि नारी रोगों को दूर कर उन्हें स्वस्थ व गर्भधारण करने योग्य बनाता है। स्नायविक दुर्बलता दूर करने में सक्षम होने से यह योग पुरुषों के साथ ही स्त्रियों के लिए भी सेवन योग्य है।

मंथन रस का सेवन करने से नपुंसकता, शीघ्रपतन व यौनांग की शिथिलता जैसी शिकायतें दूर हो जाती हैं और पर्याप्त यौनशक्ति, वीर्य स्तंभन शक्ति और यौनांग की कठोरता वाली स्थिति पुनः प्राप्त हो जाती है। एक कहावत है हाथ कंगन को आरसी क्या और पढ़े-लिखे को फारसी क्या? इस योग का सेवन कर के खुद देख लें इसकी शक्ति।
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