ब्लू व्हेल गेम का कहर, इंदौर में भी खुदकुशी की कोशिश

Last Updated: गुरुवार, 10 अगस्त 2017 (16:29 IST)
इंदौर। किस तरह से मासूमों के मस्तिष्क पर असर कर रहा है, इसका उदाहरण में देखने को मिला। यहां एक निजी स्कूल के बच्चे ने 50वीं टास्क पूरा करने के लिए स्कूल की तीसरी मंजिल से छलांग लगाने की कोशिश की। हालांकि इससे पहले कि वह छलांग लगा पाता अन्य छात्रों ने उसको पकड़ लिया।

उल्लेखनीय है कि मुंबई में हाल ही में मनप्रीत नामक एक 14 वर्षीय एक लड़के ने इसी खेल के अंतिम चरण को पूरा करने के लिए आत्महत्या कर ली थी। अमेरिका, रूस आदि देशों में तो 130 बच्चे इस वजह से खुदकुशी कर चुके हैं। मनप्रीत भारत में इसका पहला शिकार है।

इंदौर में इस तरह का यह पहला मामला सामने आया है, लेकिन बच्चों की मानसिक स्थिति पर नकारात्मक असल डालने वाले इस गेम का दायरा बढ़ता ही जा रहा है। हालांकि सवाल स्कूल प्रबंधन पर भी उठाया जा सकता है कि 7वीं कक्षा का बच्चा मोबाइल पर आखिर खेल कैसे रहा था। बताया जाता है कि छात्र गेम की अंतिम स्टेप पूरी करने को लेकर काफी तनाव में था।

राज्यसभा में गूंज : राज्यसभा में भी सदस्यों ने ‘ब्लू व्हेल’ जैसे घातक ऑनलाइन गेम से बच्चों पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव का जिक्र किया और खेल पर रोक लगाए जाने की मांग की। भाजपा सदस्य अमर शंकर सांवले ने यह मुद्दा उठाया था। केरल विधानसभा में दी गई एक जानकारी के मुताबिक केरल में ही कम से कम 2000 बच्चे इस खतरनाक गेम को डाउनलोड कर चुके हैं।
खेल खत्म यानी सब कुछ खत्म : ऑनलाइन गेम्स का बच्चों के मन और मस्तिष्क पर किस कदर असर हो रहा है, इसका उदाहरण है ब्लू व्हेल गेम। यह खेल 50 दिन में पूरा होता है। इस गेम के तहत 50 दिनों का डेयर चैलेंज मैसेज सोशल मीडिया पर सर्कुलेट किया जा रहा है। इस चैलेंज में प्लेयर को हर रोज एक डेयर को पूरा करना होता है। डेयर को पूरा करने के बाद यूजर को प्लाइवेट ग्रुप में अपनी सेल्फी पोस्ट करनी होती है। इस गेम का आखिरी डेयर आत्महत्या है।

क्या कहते हैं मनोविश्लेषक : मनोविश्लेषकों का कहना है कि लंबे समय तक जुड़े रहने पर ये खतरनाक गेम्स बच्चों, किशोरों और युवाओं को हिप्नोटाइज कर देते हैं। उनके सोचने-समझने की शक्ति प्रभावित होती है। लेवल पार करने और जीतने की धुन में वो गलत कदम उठा लेते हैं।

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