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मुख पृष्ठ » लाइफ स्‍टाइल » साहित्य » काव्य-संसार » ‍हिन्दी कविता : मेरे जाने के बाद (Hindi Poem)
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कुछ मत कहना तुम
मुझे पता है
मेरे जाने के बाद
वह जो तुम्हारी पलकों की कोर पर
रुका हुआ है
चमकीला मोती
टूटकर बिखर जाएगा
गालों पर
और तुम घंटों अपनी खिड़की से
दूर आकाश को निहारोगे
समेटना चाहोगे
पानी के पारदर्शी मोती को,
देर तक बसी रहेगी
तुम्हारी आंखों में
मेरी परेशान छवि
और फिर लिखोगे तुम कोई कविता
फाड़कर फेंक देने के लिए...
जब फेंकोगे उस
उस लिखी-अनलिखी
कविता की पुर्जियां,
तब नहीं गिरेगी वह
ऊपर से नीचे जमीन पर
बल्कि गिरेगी
तुम्हारी मन-धरा पर
बनकर कांच की कि‍र्चियां...
चुभेगी देर तक तुम्हें
लॉन के गुलमोहर की नर्म पत्तियां।
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