शब्द आवाज करने लगते हैं
- चम्पा वैद
यह शायद शब्द ही हैं जोआवाज करने लगते हैं दूर से आते शोर मेंकविता में उतरने के लिएकभी आकाश तो कभी पाताल सेसूर्य के प्रकाश में छोटे-छोटे धूल के कणों परवे सिर पैर बैठे उड़ रहे हैंमैं इनका पीछा करती हूं तोवह भागने लग जाते हैंजाड़ा आ रहा है पत्ते झड़ रहे हैंपेड़ों को नए शब्दों से लिपटा हुआदेखती हूं शाखाओं के भीतर. ...।
सौजन्य से - अक्षर पर्व