संगत | विजयशंकर की कविताएँ | हरिवंशराय बच्चन | नीरज | मील के पत्थर | मंच अपना | कथा-सागर | काव्य-संसार | व्यंग्य | मुलाकात | पत्रिकाएँ | आलेख | पुस्तक-समीक्षा | संस्मरण
मुख पृष्ठ » लाइफ स्‍टाइल » साहित्य » काव्य-संसार » घर का सुख
FILE
कहते हैं
जिन्होंने बचपन में
दरख्तों से
परिन्दों के घोंसले
गिराए होते हैं
उन्हें
घर का सुख नहीं मिलता

कितने बरसों बाद
यह जान पाया हूं
कि घर का सुख
सम्मान है
पेड़ पर घोंसले का।
संबंधित जानकारी
सौजन्य से - वागर्थ
Feedback Print