बीजेपी की भारी जीत से शुरू हुई त्रिपुरा में बदले की राजनीति

पुनः संशोधित बुधवार, 7 मार्च 2018 (11:27 IST)
त्रिपुरा में चुनावी नतीजे आने के बाद से स्थिति नाजुक बनी हुई है। दक्षिणी त्रिपुरा में की मूर्ती ढहा दी गयी है। सैकड़ों सीपीएम काडरों के घर और दफ्तरों हमलों की खबरें आ रही हैं।
पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में फ्रंट के 25 वर्षों के शासन का अंत कर भारी बहुमत के साथ सत्ता में आने वाली बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने चुनावी नतीजों के एलान के बाद से पूरे राज्य में हिंसा मचा दी है। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सीपीएम काडरों के सैकड़ों घर जला दिए हैं और सीपीएम और उससे जुड़े संगठनों के सौ से ज्यादा दफ्तरों पर कब्जा कर लिया है।
दक्षिण त्रिपुरा में तो कथित बीजेपी कार्यकर्ताओं ने बुलडोजर के जरिए लेनिन की एक विशाल मूर्ति को भी ढहा दिया है। राज्य के कई हिस्सों में धारा 144 लागू कर दी गई है। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी मंगलवार को राज्यपाल तथागत राय और पुलिस महानिदेशक से फोन पर बात कर हिंसा पर अंकुश लगाने को कहा। लेकिन बावजूद इसके हालात जस के तस हैं। इसबीच राज्यपाल तथागत राय के एक ट्वीट पर भी विवाद बढ़ रहा है। हिंसा के डर से कई सीपीएम नेता व काडर अपना इलाका छोड़ कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं।
हिंसा का तांडव
शनिवार देर शाम को चुनावी नतीजों में बीजेपी की भारी जीत की खबरें सामने आने के साथ ही राज्य के विभिन्न इलाकों से हिंसा व आगजनी की खबरें भी मिलने लगीं। रविवार और सोमवार को भी हिंसा जारी रही। इस हिंसा को लिए सीपीएम और बीजेपी ने एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया है।

बीजेपी की दलील है कि सीपीएम के काडर खुद ही हिंसा कर बीजेपी को बदनाम कर रहे हैं। पार्टी का आरोप है कि सीपीएम काडरों के हमले में पार्टी के चार दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं जिनमें से 17 अस्पताल में हैं। बीजेपी ने कहा है कि दक्षिण त्रिपुरा के बेलोनिया शहर में लेनिन की प्रतिमा ढहाने में उसका कोई कार्यकर्ता शामिल नहीं था। इसबीच पुलिस ने उक्त प्रतिमा ढहाने वाले बुलडोजर के ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि बीजेपी के विजय जुलूस के दौरान ही कुछ लोगों ने बुलडोजर को प्रतिमा की ओर बढ़ने का इशारा किया। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में प्रतिमा ढहाते समय भारत माता की जय के नारे भी गूंज रहे हैं।
बीजेपी प्रवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती ने इस बारे में कहा, "इलाके के लोग स्वामी विवेकानंद, सरदार वल्लभ भाई पटेल औक मदर टेरेसा जैसे राष्ट्रीय हीरो की प्रतिमाएं लगाना चाहते हैं।" उन्होंने कहा कि बेलोनिया की घटना लोगों की नाराजगी का नतीजा है। इसबीच राज्यपाल तथागत राय के एक ट्वीट पर भी विवाद बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि एक लोकतांत्रिक सरकार के फैसले को दूसरी लोकतांत्रिक सरकार आसानी से बदल सकती है। उसके बाद ही राजनाथ ने राज्यपाल से बात की।
दूसरी ओर, सीपीएम के प्रदेश सचिव बिजन धर आरोप लगाते हैं, "शनिवार रात से ही राज्य के विभिन्न हिस्सों में भाजपा कार्यकर्ताओं के हमले जारी हैं। हिंसा की एक हजार से ज्यादा घटनाओं में सीपीएम के पांच सौ से ज्यादा कार्यकर्ता घायल हो गए हैं और दो सौ घर जला दिए गए हैं।" धर का दावा है कि पार्टी के 64 दफ्तरों में तोड़फोड़ की गई है और बीजेपी ने सौ से ज्यादा दफ्तरों पर जबरन कब्जा कर लिया है। टीवी चैनलों की फुटेज में यहां सीपीएम से संबद्ध मजदूर संगठन सीटू के दफ्तर पर बीजेपी का झंडा फहराते देखा गया है।
इसबीच बीजेपी विधायक दल के नेता और नवनियुक्त मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने भी एक बयान में लोगों से शांति बहाल रखने की अपील करते हुए कहा है कि हिंसा में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। राज्य में बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार 9 मार्च को शपथ लेगी। राज्यपाल ने मंगलवार को ही बिप्लब को अगला मुख्यमंत्री नियुक्त करते हुए उनको सरकार बनाने का न्योता दिया।

अन्य प्रदेशों में विरोध
त्रिपुरा की हिंसा और लेनिन की मूर्ति ढहाने का विरोध त्रिपुरा के अलावा पश्चिम बंगाल व केरल में भी हो रहा है। बंगाल की राजधानी कोलकाता में लेफ्ट फ्रंट के नेताओं ने इसके विरोध में आज एक रैली निकाली और दोषियों को गिरफ्तार करने की मांग की। दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है। वह कहती हैं, "ऐसी अलगाववादी राजनीति जल्दी ही गांधी, सुभाष चंद्र बोस और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमाओं को भी निशाना बनाएगी।"
ममता का कहना है कि माकपा के साथ उनके सैद्धांतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन लेनिन जैसे किसी नेता की प्रतिमा ढहाना उनको बर्दाश्त नहीं होगा। ममता ने कहा कि त्रिपुरा के विकास पर ध्यान देने की बजाय बीजेपी नेताओं का हिंसा में शामिल होना दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि आखिर यह कैसी राजनीति है, "वे लोग आज लेनिन की प्रतिमा गिरा रहे हैं और कल गांधी, बोस, रबींद्र नाथ टैगोर, विवेकानंद व बिरसा मुंडा की प्रतिमाओं के साथ भी यही सलूक करेंगे।"
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि त्रिपुरा में लेफ्ट के काडरों ने जो बोया है वही काट रहे हैं। बीते दो-तीन वर्षों से राज्य में भारी हिंसा होती रही है। इनमें बीजेपी के कार्यकर्ताओं के अलावा कई पत्रकारों को भी जान से हाथ धोना पड़ा है।

राजनीतिक विश्लेषक रमेंद्र देबबर्मा कहते हैं, "भारी जीत से उत्साहित बीजेपी के लोग अब बदले पर उतारू हैं। लेकिन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को इस हिंसा पर रोक लगानी चाहिए। इससे आम लोगों में गलत संदेश जाएगा।" लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री के फोन और राज्यपाल की अपील के बावजूद राज्य के खासकर ग्रामीण इलाकों से हिंसा व आगजनी की खबरें आ रही हैं। उन इलाकों में आम लोग भी डर के मारे सुरक्षित जगहों पर जा रहे हैं। ऐसे में 9 मार्च को सत्ता संभालने वाली नई सरकार के समक्ष कानून व व्यवस्था पर अंकुश लगाना ही सबसे बड़ी चुनौती होगी।
- प्रभाकर, कोलकाता


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