भगवा रंग में रंगा है यूपी का एक मदरसा

Last Updated: मंगलवार, 26 सितम्बर 2017 (11:48 IST)
आजकल भारत के कई राज्यों में मदरसों को लेकर बहस छिड़ी हुई है। मदरसों पर तरह तरह के आरोपों और नए नए सरकारी आदेशों के बीच का एक मदरसा है ऐसा भी।

उत्तर प्रदेश में मदरसों को स्वतंत्रता दिवस मनाने, झंडारोहण करने और पूरे कार्यक्रम की वीडियोग्राफी करने का आदेश दिया गया था। उसके बाद मदरसों को अपने सारे शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों का ब्योरा ऑनलाइन करने को कहा गया।

मदरसों में 'वन्दे मातरम' और 'भारत माता की जय' का घोष करने पर विवाद होता रहा है। इस तरह की तमाम बातों को मदरसे अपने ऊपर बंदिश मानते रहे हैं। उनके अनुसार, ऐसे आरोपों से उनकी देशभक्ति पर अंगुली उठायी जाती है, जबकि वो हमेशा से राष्ट्र प्रेम की शिक्षा देते आ रहे हैं। कुछ संगठन इसको भगवाकरण की कोशिश भी मानते हैं। उनका कहना है कि मदरसों पर इस तरह के आरोप तो लगा दिए जाते हैं लेकिन हिंदूवादी संगठनों की आस्था असल में भगवा ध्वज में ज्यादा लगती है।
ऐसे ही आरोपों और बहस के बीच लखनऊ से लगभग 140 किलोमीटर दूर अंबेडकरनगर जिले में एक मदरसा अपने आप को भगवा रंग में रंग चुका है। ये मदरसा फैजाने गरीब नवाज़ अम्बेडकरनगर के मोरादाबाद मोहल्ले में स्थित है। यहां हर तरफ भगवा रंग दिखता है, भारत माता और वन्दे मातरम का जयकारा भी लगता है। उत्तर प्रदेश में सरकार द्वारा अनुदानित और मान्यता प्राप्त लगभग उन्नीस हजार मदरसे हैं। प्रदेश सरकार ने मदरसों के लिए अलग वेब पोर्टल बनाया है। जिसमें इन मदरसों को रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। ना करवाने की स्थिति में इनको किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा।
अंबेडकरनगर के इस मदरसे की खास बात ये है कि यहां बच्चों और शिक्षकों की ड्रेस भी भगवा रंग की है। लड़कियों के लिए भगवा कुर्ती और सफेद सलवार और लड़कों के लिए भगवा शर्ट और सफेद पैंट। यही नहीं मदरसे में पढ़ने वाली शिक्षिकाओं के लिए भी भगवा ड्रेस है। उन्हें भगवा सलवार कमीज पहन कर आना होता है। मदरसे से पता चला कि यहां सब लोग भगवा पहन रहे हैं, किसी को कोई ऐतराज नहीं है और बच्चों के परिजन भी सहमत हैं।
ये भगवा ड्रेस मदरसे में साल 2014 से चल रही है। इसी साल नरेन्द्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने थे। हालांकि मदरसे के प्रबंधक बरकत अली ऐसी किसी बात से इनकार करते हैं। उन्होंने बताया, "जब 2014 में हम लोगों ने मदरसे का कार्यभार संभाला तो देखा इसमें लगभग आधे हिंदू बच्चे पढ़ते हैं। हमको उनकी धार्मिक भावनाओं का भी सम्मान करना था। उनके लिए भगवा रंग धार्मिक आस्था का मामला है। हमको ड्रेस तय करनी थी और हमने भगवा रंग चुन लिया। ये बात हम जानते थे कि ये रंग हिन्दुओं से जुड़ा हुआ है।"
मदरसे के प्रबंधक बरकत अली ने भगवा ड्रेस तो चुन ली लेकिन इस रंग का कपड़ा मिलना अंबेडकरनगर में मुश्किल हो गया। अंबेडकरनगर में बुनकर बहुत रहते हैं लेकिन भगवा रंग का कपड़ा किसी के पास नहीं था। फिर बरकत अली ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गृह राज्य में व्यापारियों से संपर्क किया और पचास हजार रुपए का कपड़ा मंगवाया। ये कपड़ा सबको नि:शुल्क दिया गया और सबने ड्रेस बनवायी। आज तीन साल बाद भी कपड़ा गुजरात से हर साल मंगवाया जाता है।
यही नहीं, मदरसे में कई और ऐसी चीजें भी होती आयी हैं जो आजकल बहस का विषय बनी हुई हैं। जैसे सुबह बच्चों की असेंबली में बच्चे पहले 'ऐ मालिक तेरे बन्दे हम...' गाते हैं, फिर राष्ट्रगान और फिर 'भारत माता की जय' और 'वन्दे मातरम' के जयकारे लगाए जाते हैं। इसके बाद ही बच्चे पढ़ने के लिए क्लास जाते हैं और किसी को कोई आपत्ति नहीं है।

बरकत अली के अनुसार उनको मुसलमानों की तरफ से किसी भी प्रकार की आपत्ति नहीं मिली। फिलहाल मदरसे में क्लास 1 से 5 तक की पढ़ाई होती है। लगभग 100 बच्चे हैं। इनमें आधे हिंदू हैं जो ज्यादातर दलित समुदाय के हैं। कोई 6-7 गुप्ता परिवार के भी बच्चे हैं। शिक्षिकाओं में भी कई हिंदू हैं। उनके नाम गिनाते हुए अली कहते हैं कि विजया और अन्तिमा, दोनों हिंदू हैं लेकिन मदरसे में पढ़ाती हैं। प्रिंसिपल फातिमा बानो के अनुसार बच्चों और टीचरों में भगवा रंग को लेकर कोई परेशानी नहीं हैं। मदरसे में जब हिंदू बच्चे भी हैं तो ऐसे में वहां सभी विषयों की पढ़ाई होती है। ये जरूर हैं कि मुस्लिम बच्चे अगर अरबी पढ़ना चाहें तो उसकी सुविधा भी है।
इस भगवा मदरसे की चर्चा हर जगह है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं है। बरकत अली अपने मदरसे के निरीक्षण के लिए स्थानीय अधिकारियों से भी निवेदन करते हैं। अली चाहते हैं कि अधिकारी खुद आकर देखें कि मदरसे में आतंकवाद की शिक्षा नहीं दी जाती।

वैसे तो हर शहर, कस्बे में मुसलमानों ने मदरसे खोले हैं। इनकी कोई गिनती नहीं क्योंकि ये कहीं रजिस्टर्ड नहीं। मान्यता प्राप्त मदरसों में उर्दू, अरबी और बेसिक मैथ्स, साइंस की पढ़ाई होती है और इनकी परीक्षा हाई स्कूल के समकक्ष मानी जाती हैं। इनका सिलेबस उत्तर प्रदेश मदरसा परिषद् द्वारा मान्य होता है। वहीं बिना रजिस्ट्रेशन के खुले मदरसों पर कोई नियंत्रण नहीं है। आम तौर पर ये दीनी तालीम देते हैं। ये न किसी से कुछ लेते हैं न किसी से कुछ मांगते हैं। आम तौर पर यह जिस फिरके के मुसलमान होते हैं, उसी का अनुसरण करते हैं। जैसे देवबंद फिरके का मदरसा अलग, बरेलवी फिरके का अलग होता है।
हाल के समय में मदरसे भाजपा के निशाने पर रहते हैं। भाजपा नेता जब तब इन मदरसों को अपने भाषण में उठाते हैं। कभी इनको आतंक का अड्डा कहा जाता है। तो कभी ये भी कहा जाता है कि ये वन्दे मातरम नहीं गाते, भारत माता की जय नहीं बोलते। समय समय पर मांग उठती है कि इन मदरसों को मुख्यधारा में लाया जाए।

रिपोर्ट: फैसल फरीद

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