क्या बीमार कर रही आपकी नौकरी

पुनः संशोधित गुरुवार, 11 मई 2017 (16:43 IST)
आज कल नौकरीपेशा लोगों के बीच "बर्नआउट" शब्द आम हो गया है। यह काम के बोझ से होने वाले बहुत गंभीर मनोवैज्ञानिक असर के बारे में है, लेकिन कई लोगों को खुद ही लगने लगता है कि वे बर्नआउट के शिकार हैं। देखिए क्या है इसके लक्षण।
सनकी हो गए हैं:
आम तौर पर हर चीज को लेकर आप ज्यादा कटु या निन्दापूर्ण टिप्पणी दे देते हैं। अच्छे सहकर्मियों के बारे में भी कमियां ढ़ूंढते रहते हैं। दूसरों को किसी काम का श्रेय मिलने पर जलन महसूस करते हैं। तो कहीं ना कहीं आपके काम का बोझ भी आपको ज्यादा सनकी बना रहा है।

भाग जाना, भूल जाना चाहते हैं:
सुबह दफ्तर पहुंचे कुछ ही घंटे हुए और आप तभी से वहां से निकलने का इंतजार रहने लगे। किसी ऐसी जगह जाने का ख्याल आने लगे जहां शांति और सुकून हो। ऐसी "लालसा" असल में "बर्नआउट" की ओर इशारा करती है। भाग जाना किसी मुस्किल स्थिति से निकलने की सबसे आम प्रतिक्रिया होती है।
आसान कामों में भी गलतियां होना:
आप जो काम चुटकियां बजा कर कर लेते थे, उनमें भी गलतियां होने लगी हैं। ऐसा ध्यान भटकने के कारण होता है और अगर ऐसा ही चलता रहे तो ध्यान देना चाहिए कि कहीं आप भी "बर्नआउट" के शिकार तो नहीं हो रहे। पिछली मीटिंग में कही गयी कोई बात याद नहीं रही या रोजमर्रा के काम भूलने लगे हैं।
हमेशा थके थके से:
क्या वीकेंड को लेकर हमेशा आपका प्लान यही रहता है कि पूरा दिन सोकर बिताना है। ऐसी थकान महसूस होती हो जो आराम करके उठने के बाद भी ना जाती हो। यह थकान, तनाव और "बर्नआउट" के लक्षण हो सकते हैं। यह हालात शारीरिक से ज्यादा मानसिक और भावनात्मक थकान की ओर इशारा करते हैं।
खुद पर संदेह:
आप जहां भी हैं, जो भी काम कर रहे हैं, बड़ी मेहनत से वहां तक पहुंचे हैं। ऐसा क्यों होने लगा है कि कभी कभी आप अपनी ही क्षमताओं पर ही संदेह करने लगे हैं। अपने बारे में, अपने भविष्य के बारे में सोचने पर अंधेरा दिखता हो, तो यह भी बर्नआउट ही है। काम के अत्यधिक बोझ से आपका दिमाग कभी कभी ऐसे भी निपटने की कोशिश करता है।

बदन में दर्द:
कभी सिर का दर्द तो तो कभी पीठ में, ऐसा दर्द जो कभी नहीं जाता। आपको दर्द हमेशा महसूस होता रहता है, लेकिन इतना ज्यादा भी नहीं होता कि आप तुरंत डॉक्टर के पास जाने का सोचें। कभी कभी यह दर्द आपके काम के शेड्यूल से जुड़ा भी हो सकता है। अत्यधिक तनाव से कई बार बुखार से लेकर दिल की बीमारियां तक लग जाती हैं।
छोटी छोटी बातों पर चिढ़ना:
कभी बॉस की बुराई तो कभी चालू बनने वाले सहकर्मियों की- ऐसा नहीं कि कोई बॉस सचमुच बुरा नहीं होता या बाकी लोग धोखा नहीं देते, लेकिन यह भी सच है कि सभी ऐसे नहीं होते। तो अगर आप हमेशा सबके बारे में ऐसे ही ख्याल रखते हैं, तो उसका कारण भी आपका "बर्नआउट" हो सकता है। (एमएल/आरपी)

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