बीयर और मस्ती के बीच यौन हिंसा का कड़वा सच

पुनः संशोधित शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2018 (11:31 IST)
का दुनिया भर में अपनी बीयर, प्रेत्सेल कहे जाने वाले खास ब्रेड और चमड़े वाली हाफ पेटों के लिए जाना जाता है। लेकिन महिलाओं से बदसलूकी और यौन उत्पीड़न भी इस फेस्टिवल का एक कड़वा सच है।

म्यूनिख के इस विश्व प्रसिद्ध फेस्टिवल में स्थानीय जर्मन ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के लोग पहुंचते हैं। खाने के स्टॉल और बीयर परोसने वाले टेंटों के सामने लंबी कतारें लगी रहती हैं। सबकी एक ही ख्वाहिश होती है कि सर्द रात में टेंट के भीतर कोई आरामदायक सी गर्म जगह मिल जाए।


लेकिन इस साल एक बीयर टेंट में हुई लड़ाई में एक व्यक्ति की जान चली गई। ऐसे में, जब हमने वहां मौजूद लोगों से और खासकर महिलाओं से पूछा कि क्या वे सुरक्षित महसूस करती हैं, तो वे पुलिसकर्मियों और अन्य सुरक्षा कर्मियों की भारी तैनाती की तारीफ करने लगीं। जब हमने पूछा कि क्या एक महिला के तौर पर वह अक्टूबर फेस्ट में खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं तो वे चुप हो गईं।

इस साल अब तक म्यूनिख की पुलिस ने अक्टूबर फेस्ट के दौरान यौन हिंसा के 21 मामले दर्ज किए हैं जिनमें यौन उत्पीड़न, यौन हमले और के मामले भी शामिल हैं।


अक्टूबर फेस्ट के पहले दिन 22 सितंबर को पुलिस ने म्यूनिख के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जिस पर फिनलैंड से आई एक महिला का बलात्कार करने का आरोप है। इसके कुछ दिन बाद एक अज्ञात व्यक्ति ने 43 साल की एक महिला की स्कर्ट में हाथ डाल दिया। जब महिला ने इसका विरोध किया, तो उस व्यक्ति ने एक लीटर बीयर महिला के मुंह पर फेंक दी।

पुलिस ने आधा फेस्टिवल बीत जाने के बाद जारी अपनी "हाफटाइम" रिपोर्ट में कहा है कि पिछले साल के मुकाबले इस बार कम मामले सामने आए हैं, लेकिन हाल के कुछ सालों में अक्टूबर फेस्ट के दौरान यौन हमलों और उत्पीड़न के मामले बढ़े हैं।


वर्ष 2017 में फेस्टिवल के दौरान यौन उत्पीड़न के कुल 67 मामले दर्ज किए गए जो 2016 में दर्ज 34 मामलों की तुलना में लगभग दोगुने थे। अधिकारी मामलों में वृद्धि की एक वजह जर्मनी में यौन अपराधों से जुड़े कानून में हो रहे बदलवों को भी मानते हैं, जिसमें अब अनुचित तरीके से छूने और अन्य तरह से परेशान करने को भी यौन उत्पीड़न के दायरे में रखा गया है। यह बदलाव 2016 के अक्टूबर फेस्ट खत्म होने के बाद किए गए थे।

कई महिलाओं ने डीडब्ल्यू से बातचीत में कहा कि उन्होंने निजी रूप से कभी ऐसी स्थिति का सामना नहीं किया है लेकिन वे बीयर टेंट में इसे पार्टी के माहौल का हिस्सा मानती हैं।


अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन एल्कोहल अब्यूज एंड एल्कोहलिज्म के शोध में कहा गया है कि यौन हमलों के आधे मामले नशे की हालत में होते हैं। पीने के बाद व्यक्ति के व्यवहार को नियंत्रित करना पुरुष का नहीं, बल्कि महिलाओं का काम माना जाता है। उनसे कहा जाता है कि खुद को बचाना उनका काम है।

27 साल की कारमैन कहती हैं, "आप शराब को जिम्मेदार ठहराते हैं और अनदेखा करने की कोशिश करते हैं। लेकिन आप यह बात मानकर ही चलिए कि ऐसा होगा ही, खास कर जैसे जैसे रात होती है।"


फेस्ट में महिलाओं और लड़कियों के लिए एक सिक्योरिटी पॉइंट भी बनाया गया है, जिसे ढूंढना ही काफी मशक्कत का काम है। इस पॉइंट पर अकसर ऐसी महिलाएं दिखती हैं जो अपने ग्रुप से बिछड़ गई हैं और उन्हें मदद की जरूरत है। लेकिन ऐसी पांच महिलाएं भी यहां पहुंचीं जिन्हें यौन हिंसा का सामना करना पड़ा।

अक्टूबर फेस्ट में आई 27 साल की ईसाबेला कहती हैं कि ज्यादातर महिलाएं अपने साथ बदसलूकी होने पर पुलिस या टेंट में तैनात सुरक्षाकर्मियों को इसकी जानकारी नहीं देती हैं। वे इस तरह की बातों को अनदेखा करना ही बेहतर समझती हैं।


रिपोर्ट रेबेका श्टाउडेनमायर


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