गिरती जीडीपी वृद्धि दर के लिए रघुराम राजन की नीतियां जिम्मेदार : नीति आयोग

पुनः संशोधित मंगलवार, 4 सितम्बर 2018 (13:08 IST)
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 8.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो 3 साल में उच्चतम स्तर पर है। इस बीच के उपाध्यक्ष ने पिछले 3 सालों में विकास दर में गिरावट के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के को जिम्मेदार ठहराया है।

राजीव कुमार ने कहा कि आरबीआई के गवर्नर के रूप में रघुराम राजन की नीतियों के चलते जीडीपी की वृद्धि दर आधे दर्जन से अधिक तिमाहियों में गिर रही थी। राजीव कुमार ने कहा कि विकास दर में गिरावट की प्रवृत्ति थी और ये कमी क्यों आई?

बढ़ता एनपीए, बैंकिंग क्षेत्र में गैरनिष्पादित संपत्तियों के कारण से वृद्धि में कमी आई थी। 2014 में जब नई सरकार आई, तो ये आंकड़े लगभग 4 लाख करोड़ रुपए थे। 2017 के मध्य तक यह 10.5 लाख करोड़ रुपए हो गया।

उन्होंने कहा कि एनपीए बढ़ा और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर में कमी आई क्योंकि पिछले गवर्नर राजन ने गैर निष्पादित संपत्तियों की पहचान के लिए नए तंत्र स्थापित किए थे और इन्हें लगातार बढ़ना जारी रखा गया। यही कारण है कि बैंकिंग सेक्टर ने इंडस्ट्री को ऋण देना बंद कर दिया।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि जिस इंडस्ट्री ने देश की अर्थव्यवस्था को प्रेरित किया उसे बैंकों से पैसा नहीं मिल रहा था, जिससे बाजार में सुस्तता बढ़ी और जीडीपी की वृद्धि दर में गिरावट आई। राजीव कुमार ने कहा कि मध्यम और लघु उद्योग जैसे कुछ मामलों में क्रेडिट वास्तव में घट गया। कुछ वर्षों में नकारात्मक वृद्धि हुई।

बड़े उद्योगों में भी क्रेडिट की वृद्धि 1 प्रतिशत से 2.5 प्रतिशत तक गिर गई और कुछ तिमाहियों में नकारात्मक भी रही। राजीव कुमार ने उन आरोपों को भी नकार दिया कि नोटबंदी से विकास दर में गिरावट हुई है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से झूठ है।


और भी पढ़ें :