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पाँच तरीके एक सफल कार्यकारी जीवन के

कमल शर्मा|
फार्च्युन-500 कंपनियों को पिछले 14 सालों से सेवा प्रदान करने वाली एक कंपनी की संस्थापिका और अध्यक्ष नैन्‍सी कोलासुर्डो ने अपनी पुस्तक 'गेट ए लाइफ दैट डज नॉट सक' में नए उद्यमियों के लिए कुछ बेहतरीन तरकीबों का उल्लेख किया है जो अच्छी तरह से जीवन जीने के बारे में और अपने कारोबार की सफलतापूर्वक शुरुआत करने के बारे में उपयोगी हो सकती है। उद्यमिता को विकसित और परिपुष्ट करने के लिए जरूरी इन पाँच प्रमुख तत्वों के बारे में आप भी जानिए।

1- चुनिए आप जो, जैसा चाहते हैं, इसे समझने के लिए इस पर पूरा ध्यान केंद्रित करें। ऐसा करने से आप अच्छे चुनाव कर सकेंगे। यदि आपने कोई मनचाहा कारोबार शुरू करना तय कर लिया है, लेकिन पैसा आपके पास है नहीं और कुछ परेशान करने वाली उधारियाँ भी आप पर अभी बकाया हैं। ऐसे में, यह ध्यान केन्द्रीयकरण आपको पैसे की व्यवस्था के अन्य विकल्पों पर तार्किक रूप से सोचने में मदद देता है कि पैसा परिवार के लोगों से उधार ले लिया जाए या वे चीजें बेचकर जुटा लिया जाए, जिनकी जीवन में अति महत्वपूर्ण जरूरत नहीं। यह हमेशा चुनने का विषय होता है।

2- अच्छे विचार उत्पन्न करें। अधिकतर नए उद्यमी अपने नए कारोबार की गिरावट के प्रति तो सचेत रहते हैं, लेकिन वे स्वयं पर इतना सचेत फोकस नहीं रखते। सबसे सफल उद्यमी वे होते हैं, जो अच्छी चीजों पर फोकस करते हैं, उन संभावनाओं पर जो आगे हो सकती हैं। यह सोचने का तरीका ही है, जो आपको सफलता की ओर ले जाता है।

3- शुरुआत नए उद्यमी ढेरों विचारों से ओत-प्रोत होते हैं, लेकिन जब तक वे उनको कार्यरूप में परिणत नहीं करते, तब तक कुछ भी घटित नहीं होता और परिस्थितियाँ ज्यों की त्यों बनी रहती हैं। परिस्थितियों की यथास्थिति, अपने उन विचारों के प्रति भी संदेह को जन्म देने लगती है, जो अमल में लाए जाने पर बेहतर परिणाम दिखा सकते थे।

दूसरों की कंपनी में कार्य करने वाले उद्यमी अपना कार्य-आरम्भ करने की सोचने पर सुरक्षात्मक कारणों से चिंतित होते हैं। लोग सोचते हैं कि वे उलझ जाएँगे और समस्याग्रस्त हो जाएँगे, लेकिन सच यह है कि जैसे ही आप कोई छोटी-सी भी, अनूठी शुरुआत करते हैं, तो इसके साथ ही नई संभावनाओं के द्वार खुलने आरम्भ हो जाते हैं।

इन संभावनाओं की आप पहले से ही भविष्यवाणी नहीं कर सकते, न ही आपके लिए कोई दूसरा इसे निश्चित करने वाली भविष्यवाणी कर सकता है। लेकिन अवसरों का सृजन इसी तरह से होता है। एक बार वांछित और अवांछित समस्याओं से परिचित हो जाने के बाद आप उनसे निबटते हुए, अपनी गति को बढा़ना सीख जाते हैं।

शुरुआत छोटी तरह से ही हुआ करती है। यह एक फोन कॉल से भी हो सकती है, जब आप अपने गुरु से सम्पर्क करें या योजना को लागू करने से पहले अपने खाते में छोटी-छोटी धनराशियाँ इकट्ठा करना शुरू करें। कार्य का आरम्भ एक आश्चर्यजनक प्रस्थान-बिन्दु होता है। तमाम चीजों और विचारों के बीच चुनिए कि आपकी प्राथमिकता क्या होनी चाहिए? सभी चीजें एक दूसरे से संबंधित हैं, जिनके बीच समायोजन, शुरुआत के पीछे स्वयमेव आता है।

4- एक व्यवस्था निर्मित करें उद्यमियों के बारे में यह देखा गया है कि सामान्यतया प्रबंधन करते हुए वे अपने कार्य को अधिक सुचारु रूप से विकसित नहीं कर पाते। सही लेखे रखने के लिए और ग्राहकों से वादे पूरे करने के लिए उनको कुछ प्रणालियाँ अपनानी होती हैं। इसे वे खुद यदि नहीं कर सकते, तो उन्हें ऐसे लोगों को पकड़ना चाहिए जो कम महत्वपूर्ण होते हुए भी ऐसे गुणों से युक्त होते हैं, फिर चाहे वह उनका हेअर-स्टाइलिस्ट ही क्यों न हो। ऐसे लोगों की भी नि:संकोच मदद ली जा सकती है।

कार्य शुरू करते समय की जाने वाली सबसे बड़ी चूक में शुमार है वादों का पूरा न किया जाना। वादे- आपूर्तिकर्ताओं के प्रति, सहकर्मियों के प्रति, समुदाय में किसी के भी प्रति। अधिकतर उद्यमी अपने उत्पाद के प्रति, अपनी सेवा और उद्देश्यों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं और उस बुनियादी ढाँचे के प्रति उतने अधिक सचेत नहीं होते, जो इसमें अप्रत्यक्ष रूप से मददगार होता है। बिना समवेत व्यवस्था के योजनाओं को लागू किया जाना, बालू पर बहुमंजिला भवन निर्मित करने की तरह है। वांछित सफलता के लिए इन बातों की गाँठ बाँध लेना बहुत आवश्यक है।

5- कहिए वह जो आप चाहते हैं, करिए वह जो आप कहते हैं आपकी समवेत शक्ति आप में निहित है। आपकी प्रतिष्ठा से अधिक महत्वपूर्ण कुछ और चीजें भी होती हैं। ढेर सारे वादे करके उनकी कसौटी पर खरे न उतरना बुरी बात है। इस तरह चीजें स्वयमेव घटित होने लगती हैं और उन पर से आपका नियंत्रण खत्म होने लगता है। कार्य को विश्वसनीय और प्रशंसनीय तरीके से चलाने के लिए जरूरी है कि आप वही कहें, जो किया जाना सम्भव हो, और वह भी तय समय सीमा के अंदर और जो कहा है, उसे किए जाने का पूरा प्रयास करें।

अधिकतर कारोबारों में शुरुआती स्तर पर पूर्व सम्पर्कों, रिश्तों का लाभ उठाया जाता है, जहाँ वादों की अति से बचना चाहिए। शुरुआती दौर अति उत्साह भरा होता है, जबकि ग्राहकों एवं अन्य व्यापारिक सहयोगियों को सभी मानकों पर पूर्ण संतुष्ट करने लायक योग्यता हासिल करने में वक्त लगता है।

अपने सिस्टम को स्वयं व्यवस्थित करें। सफल कारोबारी, बेताबियों से बचते हैं और धैर्यपूर्वक वही वादे करते हैं, जिनको पूरी तरह निभाया जा सकता हो। चीजों से भावनात्मक लगाव न रखना अधिक हितकर होता है, जो आपको दुश्वारियों के समय संवेदनशील कार्यवाही के बजाय तार्किक फैसले करने को प्रेरित करता है।

वांछित परिणाम की प्रत्याशा साकार करने के लिए आपको सर्वाधिक मदद अपनी करनी होगी। अच्छे विचार और अच्छे चयन के अभाव में आप अपने कार्य को ज्यादा देर तक, ज्यादा दूर तक नहीं ले जा सकते। आपके विचारों तथा आप द्वारा नहीं की गई कार्यवाहियों के मध्य का अंतर ही जीवन को गिरावट की ओर ले जाता है। इस अंतर को कमतर करने के प्रयास किए जाने चाहिए, जिसमें यह बातें मददगार होंगी।

*यह लेखक की निजी राय है। किसी भी प्रकार की जोखिम की जवाबदारी वेबदुनिया की नहीं होगी।
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