निबंध
|
बाल दिवस
|
चिट्ठी-पत्री
|
कहानी
|
क्या तुम जानते हो?
|
हँसगुल्ले
|
प्रेरक व्यक्तित्व
|
कविता
|
अजब-गजब
मुख पृष्ठ
»
लाइफ स्टाइल
»
नन्ही दुनिया
»
कविता
»
बाल कविता: बंदर मामा, पहन पजामा
(Hindi Poems for Kids)
बाल कविता: बंदर मामा, पहन पजामा
-क्षितिजा सक्सेना
रविवार, 3 जून 2012( 11:32 IST )
FILE
बंदर मामा, पहन पजामा
निकले थे बाजार
जेब में उनके कुछ थे पैसे
करना था व्यापार
एक दुकान थी बड़ी सजीली
वहां बनी थी गर्म जलेबी
मामा का मन कुछ यूं ललचाया
क्या लेना था याद न आया
गर्म जलेबी खाई झट से
जीभ जल गई फट से, लप से
फेंका कुर्ता फेंकी टोपी
और भागे फिर घर को
दोबारा फिर खाने जलेबी
कभी न गए उधर को।
संबंधित जानकारी
बाल कविता : क्या-क्या खाकर आए
बाल कविता: दादी मां मेरी प्यारी प्यारी
बच्चों की कविता : आई छुट्टी मस्ती वाली
बाल कविता : जल की रानी मछली
बच्चों की कविता : हाथी
हिन्दी कविता,
बच्चों की कविता,
बाल कविता,
किड्स पोएम,
चिल्ड्रंस पोएम