पर्यावरण दिवस पर बाल नाटिका : पेड़ों की पंचायत

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- डॉ. प्रीति प्रवीण खरे
 
पात्र परिचय
 

 
रोली- रिपोर्टर
मन्नत- दूसरा रिपोर्टर
आशुतोष- तीसरा रिपोर्टर
आम का पेड़
जामुन का पेड़
नीम का पेड़
बादाम का पेड़
अनार का पेड़
सीताफल का पेड़
दर्शक 

(टीवी चैनल रिपोर्टर रोली, मन्नत एवं आशुतोष भीड़ को संबोधित कर माइक पर बता रहे हैं। थोड़ी दूरी पर पेड़ों की सभा शुरू होने वाली है।)
 
रोली- दर्शकों! मैं रोली पांडे आप सभी को इस सभा का आंखों देखा हाल बताऊंगी। मेरे साथ कैमरे पर हैं आशुतोष तथा साथी। रिपोर्टर है मन्न्त। 
 
मन्नत- (रोली से) देखो यहां पेड़ों का आना जाना शुरू हो गया है। दर्शकों! मैं आपको बता दूं आज इस सभा को बुलाया है पेड़ों के राजा आम ने।
 
रोली- ये देखिए दर्शकों! आम के पेड़ पधार रहे हैं। आह... हां... हां... उन्हें देखकर मेरे मुंह में पानी आ रहा है। 
 
मन्नत- दर्शकों! मैं आपको बताना चाहूंगा आम को फलों का राजा कहते हैं। जब आम कच्चा होता है, तब उसकी चटनी और अचार बनाते हैं। पकने के बाद मीठे-मीठे रसीले आम को हम सभी स्वाद लेकर खाते हैं। 
 
रोली- आम के पीछे-पीछे नीम के हरे-भरे विशाल वृक्ष का आगमन भी हो रहा है। स्वाद में कड़वा जरूर है, लेकिन गुणों की खान है यह पेड़। 
 
मन्नत- वो देखिए दर्शकों! जामुन, अनार और बादाम तीनों बातें करते हुए एकसाथ आ रहे हैं।
 
रोली- आमंत्रित पेड़ों में एक-एक कर सभी आ चुके हैं। सबने अपना-अपना स्थान भी ग्रहण कर लिया है। लेकिन यह क्या! सभी तो शुरू हो ही नहीं रही है। (मन्नत से) क्या तुम्हें मालूम है अब किसका इंतजार हो रहा है? 
 
मन्नत- हां रोली! सीताफल के पेड़ की प्रतीक्षा की जा रही है। वे जैसे ही आएंगे, सभा शुरू हो जाएगी।
 
रोली- दर्शको! इंतजार की घड़ियां समाप्त हुई। सीताफलजी भी आ रहे हैं (दर्शकों से) अरे यह क्या! ये तो काफी कमजोर नजर आ रहे हैं। लगता है इनकी तबीयत खराब है तभी ये धीरे-धीरे चल रहे हैं।
 
मन्नत- ये देखिए दर्शकों! आम के पेड़ द्वारा सभा का अभिवादन किया जा रहा है। आगे का हाल क्यों न हम सब उन्हीं की जुबानी सुनें।

 
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