बच्चों की मनपसंद कविता : खेल...


 
 
नहीं आजकल उसको,
और कुछ सुहाता है।
उसे बच्चों के,
साथ बहुत भाता है।
 
न उसे कबड्डी ही,
खो-खो ही आती है।
पिट्ठू पर बार-बार,
चूक जाती है।
 
हार-हार बच्चों से,
खूब मार खाता है
खेल उसे बच्चों के,
साथ बहुत भाता है।
 
ढोलक न, तबला न,
बांसुरी बजा पाता।
गीत-गजल-कविता न,
लोरी ही गा पाता।
 
चिड़ियों की चें-चें में,
खूब मजा आता है।
खेल उसे बच्चों के,
साथ बहुत भाता है।
 
नहीं भजन संध्या से,
फिल्मों से है नाता।
संतों की बात कभी,
सुनने भी न जाता।
 
भूखों को, प्यासों को,
अन्न-जल दे आता है।
खेल उसे बच्चों के,
साथ बहुत भाता है। 

वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।



और भी पढ़ें :