बच्चों की कविता : रूठी बिन्नू





रूठी-रूठी बिन्नू सेरी,
रूठ गए हैं भैयाजी।
बिन्नू कहती कटा दो,
हमें से जाना है।
पर भैया क्या करे बेचारा
खाली पड़ा खजाना है।

कौन मनाए रूठी बिन्नू,
कोई नहीं सुनैयाजी।

बिन्नू कहती ले चल मेला,
वहां जलेबी खाऊंगी।
झूले में झूला झूलूंगी,
बादल से मिल आऊंगी।
मेला तो दस कोस दूर है,
साधन नहीं मुहैयाजी।

मत रूठो री प्यारी बहना,
तुमको खूब घुमाऊंगा।
सबर करो मैं जल्दी-जल्दी,
खूब बड़ा हो जाऊंगा।

चना-चिरौंजी, गुड़ की पट्टी,
रोज खिलाऊं लैयाजी।

जादू का घोड़ा लाऊंगा,
उस पर तुझे बिठाऊंगा।
ऐड़ लगाकर, पूंछ दबाकर,
घोड़ा खूब भगाऊंगा।

अम्बर में हम उड़ जाएंगे,
जैसे उड़े चिरैयाजी।

वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।



और भी पढ़ें :