मजेदार बाल कविता : दादीजी की दौड़...

Author प्रभुदयाल श्रीवास्तव|
Widgets Magazine
दादीजी ने कल दौड़ी थी,
सौ मीटर की दौड़।


 
एक लाइन में खड़ी हुई थी,
दस बूढ़ी महिलाएं।
इंतजार था विहसिल बजे और,
कसकर दौड़ लगाएं।
कौन आएगा अव्वल उनमें,
लगी हुई थी होड़।
 
विहसिल बजी तो सारे धावक,
पग सिर पर रख भागे।
सबने देखा मेरी दादी,
दौड़ रही थी आगे।
सभी दौड़ने वालों में थी,
वह सबसे बेजोड़।
 
दादी आई प्रथम दौड़ में,
उनको मिली बधाई।
और पुरस्कृत हुईं, दी गई,
उनको गरम रजाई।
कड़क ठंड में ओढ़ेंगे हम,
बच्चे बूढ़े प्रौढ़।
Widgets Magazine
वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।